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देहरादून के परेड ग्राउंड में 79वें दशहरा महोत्सव का आयोजन, सीएम धामी के सामने फेल हुआ रावण दहन का रिमोट, सेंसर ने भी दिया धोखा,

देहरादून के परेड ग्राउंड में 79वें दशहरा महोत्सव का आयोजन, 70-70 फीट के कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का भी हुआ दहन | सीएम ने कहा—अहंकार का अंत निश्चित, देवभूमि के मूल स्वरूप से समझौता नहीं

देहरादून। राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में मंगलवार को आयोजित दशहरा महोत्सव के दौरान उस समय तकनीकी अव्यवस्था देखने को मिली, जब रावण दहन के लिए लगाए गए रिमोट और सेंसर ने ऐन मौके पर काम करना बंद कर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में रावण दहन की स्वचालित व्यवस्था विफल होने के बाद आयोजकों को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े। आखिरकार 181 फीट ऊंचे रावण के पुतले को मैन्युअल तरीके से जलाया गया।May be an image of fire, fireworks, crowd and textMay be an image of crowd and text

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इस वर्ष परेड ग्राउंड में पहली बार 181 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इसके साथ ही 70-70 फीट ऊंचे कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का भी दहन हुआ। बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

सीएम धामी ने दिया सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेशMay be an image of fire and crowd

रावण दहन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेशवासियों को विजयदशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल रावण के पुतले का दहन करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर मौजूद अहंकार, बुराइयों और नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने का भी अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अहंकार की ज्वाला अंततः उसी व्यक्ति के विनाश का कारण बनती है, जो अहंकार में डूब जाता है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, व्यक्ति को अपने सिद्धांतों और आदर्शों पर कायम रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विजयदशमी सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। यह पर्व भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के साथ ही मानव जीवन में सत्य, धर्म और नैतिक मूल्यों की महत्ता भी बताता है।

देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाए रखने पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसी भी तरह के डेमोग्राफिक बदलाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सीएम ने कहा कि सरकार लव जिहाद, लैंड जिहाद और मजार जिहाद के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और अब कथित ‘थूक जिहाद’ के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने और मदरसा बोर्ड के स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू करने का भी उल्लेख किया।

1947 से दशहरा महोत्सव की परंपरा

देहरादून में दशहरा महोत्सव का आयोजन बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से वर्ष 1947 से किया जा रहा है। इस वर्ष आयोजन का 79वां संस्करण आयोजित हुआ। हर साल की तरह इस बार भी रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों के दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया।

सुरक्षा के लिए पुलिस के व्यापक इंतजाम

दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए देहरादून पुलिस ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर परेड ग्राउंड सहित प्रेमनगर के दशहरा ग्राउंड, सहस्रधारा रोड और जिले के अन्य थाना क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई।

भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग और बैरियर लगाए गए। कार्यक्रम स्थलों पर फायर ब्रिगेड तथा बम निरोधक दस्ते (BDS) की टीमें भी तैनात रहीं। पुलिस ने ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्वयं परेड ग्राउंड पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

पुलिस के अनुसार, जनपद में सभी स्थानों पर रावण दहन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।