देहरादून कैंट से UKD के दावेदार कर्नल राजेंद्र सिंह नेगी का बड़ा बयान, बेरोजगारी से लेकर महिला सुरक्षा तक उठाए सवाल
देहरादून
उत्तराखंड। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की ओर से देहरादून कैंट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश कर रहे सेवानिवृत्त कर्नल राजेंद्र सिंह नेगी ने राज्य की मौजूदा स्थिति, बेरोजगारी, पलायन और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी बात रखी। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रदेश के विकास और स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
कर्नल राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के करीब 26 साल बाद भी जनता पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, महंगाई, बेरोजगारी और पलायन जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। उन्होंने महिला सुरक्षा, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई।
कैंट क्षेत्र की समस्याओं पर रहेगा फोकस
कैंट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की अपनी मंशा जाहिर करते हुए नेगी ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं का जमीनी स्तर पर अध्ययन किया जाएगा। सड़क, नालियों, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों को समझकर उनके समाधान के लिए प्रयास करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और जनता की सेवा करने की बात भी कही।
पिछले चुनाव का भी किया जिक्र
बातचीत के दौरान कर्नल नेगी ने धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र से पिछले चुनाव में उतरने का जिक्र किया। उनके मुताबिक, उस समय प्रचार के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया था। अब कैंट क्षेत्र में उन्हें काम करने का अवसर मिला है और वह पूरे समर्पण के साथ जनता के मुद्दे उठाना चाहते हैं।
UKD संगठन और दल-बदल पर भी रखी राय
उत्तराखंड क्रांति दल की संगठनात्मक स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने लोगों से पार्टी से जुड़ने और संगठन को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर मतभेद और नेताओं का आना-जाना राजनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन संगठन के प्रति गंभीरता जरूरी है।
दल-बदल की राजनीति पर उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलना जनता के विश्वास से जुड़ा सवाल है। उनके अनुसार, राजनीतिक दल बदलने का फैसला चुनाव से पहले स्पष्ट होना चाहिए, ताकि मतदाताओं को उम्मीदवार की राजनीतिक प्रतिबद्धता की जानकारी रहे।
सरकार के विकास के दावों पर उठाए सवाल
कर्नल राजेंद्र सिंह नेगी ने राज्य में सड़कों और पुलों की स्थिति तथा गांवों के विकास को लेकर किए जा रहे दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विकास का आकलन जमीनी हालात और आम जनता को मिल रही सुविधाओं के आधार पर होना चाहिए।
फिलहाल, देहरादून कैंट से उनकी दावेदारी के बीच बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पलायन और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे उनकी बातचीत के केंद्र में रहे।
