मजदूर दिवस पर गूंजी मेहनतकशों की आवाज, 26 हजार न्यूनतम वेतन की मांग तेज
मजदूर दिवस पर गूंजी मेहनतकशों की आवाज, 26 हजार न्यूनतम वेतन की मांग तेज
उत्तराखंड, देहरादून
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर राजधानी दून में श्रमिक संगठनों ने अपने अधिकारों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सीटू के नेतृत्व में शहर के विभिन्न हिस्सों में झंडारोहण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि मुख्य केंद्र पर विशाल रैली निकालकर श्रमिकों की समस्याओं को मुखर किया गया।


गांधी पार्क से शुरू हुई रैली राजपुर रोड और घंटाघर होते हुए वापस पार्क में संपन्न हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रमिकों ने भाग लेते हुए वेतन वृद्धि, रोजगार सुरक्षा और श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध में एकजुटता दिखाई।
सभा को संबोधित करते हुए सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने कहा कि देशभर में श्रमिक अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये करने की मांग दोहराते हुए कहा कि वर्तमान वेतन में परिवार चलाना कठिन हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरी भुगतान, बोनस, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन जैसे कानूनों को कमजोर किया जा रहा है, जिससे श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है।
वक्ताओं ने नई श्रम संहिताओं को श्रमिक विरोधी बताते हुए इन्हें लागू न करने और पुराने कानून बहाल करने की मांग की। साथ ही ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर कर्मचारियों को विभागीय नियंत्रण में लाने की भी मांग उठाई गई। चेतावनी दी गई कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर औद्योगिक क्षेत्रों में आंदोलन और हड़ताल को और तेज किया जाएगा।
सीटू के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र सिंह नेगी और अन्य नेताओं ने कहा कि श्रमिकों को मिले अधिकार लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने श्रमिक-किसान एकता पर जोर देते हुए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया
📌 इतिहास से लेकर आज की चुनौतियां
सीपीआई(एम) के राज्य सचिव राजेंद्र पुरोहित ने मई दिवस के इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 1886 में शिकागो के हेमार्केट आंदोलन से इसकी शुरुआत हुई थी, जहां 8 घंटे कार्यदिवस की मांग को लेकर श्रमिकों ने बलिदान दिया। वहीं सीटू के राज्य कोषाध्यक्ष मनमोहन रौतेला ने कहा कि आज भी श्रमिक अस्थायी रोजगार, महंगाई और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
🏭 विभिन्न संस्थानों में आयोजन
मई दिवस पर टाल ब्रास फैक्ट्री, उदियाबाग चाय बागान, डाकपत्थर और हथियारी पावर हाउस समेत कई स्थानों पर झंडारोहण और सभाएं आयोजित की गईं। लखवाड़-ब्यासि जल विद्युत परियोजना में भी श्रमिकों ने कार्यक्रम कर अपनी मांगें दोहराईं। एमईएस, आईआरडी, डीआरडीओ, एफआरआई सहित विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों ने रैली में भाग लिया।
🚆 रेलवे यूनियन ने भी उठाई आवाज
नॉर्दर्न रेलवे मेन्स यूनियन शाखा देहरादून ने भी मजदूर दिवस पर श्रमिक हितों को लेकर आवाज बुलंद की। शाखा सचिव नरेश गुरुंग ने कहा कि श्रमिकों के कार्य के घंटे निर्धारित किए जाने चाहिए और निर्माण कार्य के दौरान मृत श्रमिकों के लिए जीवन बीमा राशि बढ़ाई जानी चाहिए
🎓 मसूरी में श्रमिक सम्मान
मसूरी के गुरुनानक फेथ सैटेनरी स्कूल में मई दिवस पर सफाई कर्मियों, माली और सुरक्षा कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। वहीं एटक और सीटू के नेतृत्व में मसूरी में भी रैली और प्रदर्शन आयोजित किए गए।
🏛️ कांग्रेस ने किया श्रमिक सम्मान कार्यक्रम
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ ने घंटाघर के पास श्रमिक सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने महिला श्रमिकों को सूट और पुरुष श्रमिकों को गमछा भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने सरकार पर मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रही है।

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मजदूर दिवस पर दून से मसूरी तक श्रमिकों की आवाज गूंजती रही। न्यूनतम वेतन बढ़ाने, श्रम कानूनों की सुरक्षा और रोजगार की स्थिरता जैसे मुद्दों पर संगठनों ने एकजुट होकर बड़ा संदेश दिया कि
यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।
