DEHRADUN

देवभूमि को नशामुक्त बनाने का संकल्प, प्रशासन की कड़ी तैयारी

 

देहरादून, भारत केसरी

देवभूमि को नशामुक्त बनाने के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। ड्रग्स सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए सभी एजेंसियों को एकजुट कर दिया गया है और लगातार निगरानी व कार्रवाई तेज कर दी गई है।

 

जिलाधिकारी के निर्देश पर आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक में अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा ने साफ कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के जरिए बड़े स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

 

प्रशासन ने शिक्षण संस्थानों के आसपास सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने, सभी संस्थानों में एंटी-ड्रग्स कमेटियां सक्रिय करने और हेल्पलाइन नंबर 1933 सहित अन्य सहायता माध्यमों का व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए हैं।

 

युवाओं में बढ़ते केमिकल नशे पर चिंता जताते हुए अधिकारियों ने एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, एनसीबी और औषधि विभाग को मिलकर ड्रग्स नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में औचक निरीक्षण और रैंडम सैंपलिंग भी कराई जाएगी।

जिले में नशामुक्ति केंद्रों की जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। 23 केंद्र बंद पाए गए, जबकि 15 पर कार्रवाई की गई। वहीं, 711 छात्रों के सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

ड्रग्स इंस्पेक्टर के मुताबिक मेडिकल स्टोर्स पर सीसीटीवी अनिवार्य कर दिया गया है और बिना फार्मासिस्ट दवा बिक्री पर रोक लगा दी गई है। रायवाला के नशामुक्ति केंद्र से 6 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 14 का इलाज जारी है।

 

प्रशासन जल्द ही देहरादून में बाल पुनर्वास केंद्र भी स्थापित करने जा रहा है। साफ है कि नशे के खिलाफ अब प्रशासनिक सख्ती के साथ सामाजिक भागीदारी को भी मजबूती दी जा रही है।

नशे के खिलाफ यह मुहिम कितनी कारगर साबित होती है, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी। फिलहाल देहरादून प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है।