बदरी-केदार की धार्मिक विरासत बनी महिलाओं की कमाई का जरिया, मंदिरों के मॉडल से संवार रहीं आजीविका
रुद्रप्रयाग: पहाड़ की संस्कृति, धार्मिक आस्था और स्थानीय विरासत अब ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का मजबूत आधार बन रही है। अगस्त्यमुनि विकासखंड में ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना से जुड़ी महिलाएं बदरी-केदार क्षेत्र की धार्मिक पहचान को आकर्षक स्मृति चिह्नों का रूप देकर अपनी आजीविका को मजबूत कर रही हैं। 
अगस्त्यमुनि स्थित ईस्ट घंडियाल बदरी-केदार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बदरीनाथ, केदारनाथ, धारी देवी, कार्तिक स्वामी और कालीमठ समेत विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के मंदिरों के आकर्षक मॉडल तैयार कर रही हैं। पहाड़ी वास्तुकला की झलक लिए इन स्मृति चिह्नों को श्रद्धालुओं और पर्यटकों द्वारा पसंद किया जा रहा है। उत्पादों की बिक्री से समूह की महिलाओं को घर के आसपास ही रोजगार और आय का बेहतर साधन मिल रहा है।
घर से जुड़ा रोजगार, महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का रास्ता
समूह की सदस्य दिव्या बताती हैं कि पढ़ाई के साथ वह स्वयं सहायता समूह की गतिविधियों से भी जुड़ी हैं। वह धूपबत्ती और अगरबत्ती बनाने के साथ विभिन्न मंदिरों के स्मृति चिह्न तैयार करती हैं।
दिव्या के मुताबिक, समूह से जुड़ने के बाद उन्हें घर के आसपास ही रोजगार का अवसर मिला है। साथ ही समूह की अन्य महिलाओं को भी आय अर्जित करने का जरिया मिला है।
प्रशिक्षण के साथ आर्थिक सहायता भी
खंड विकास अधिकारी अगस्त्यमुनि सुरेश शाह ने बताया कि ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के तहत महिलाओं को विभिन्न उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण देने के साथ आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने बताया कि ईस्ट घंडियाल बदरी-केदार स्वयं सहायता समूह से वर्तमान में 6 से 7 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। समूह द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री सरस केंद्रों, स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है।
बढ़ता मुनाफा, आंकड़ों में दिखी मेहनत की सफलता
समूह के प्रदर्शन के आंकड़े भी महिलाओं की मेहनत और बढ़ती बाजार मांग की तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2024-25 में समूह ने 2.54 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह लाभ बढ़कर 3.95 लाख रुपये तक पहुंच गया।
वहीं, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक समूह द्वारा करीब 7 लाख रुपये की बिक्री की जा चुकी है, जिसमें समूह को लगभग 2.75 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है।
संस्कृति भी बच रही, अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही
स्थानीय संसाधनों और पहाड़ी संस्कृति को बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादों में ढालकर ये महिलाएं दोहरा लाभ हासिल कर रही हैं। एक ओर इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, वहीं दूसरी ओर बदरी-केदार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत आकर्षक स्मृति चिह्नों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंच रही है।
ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के माध्यम से महिलाओं को मिला यह अवसर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण की नई तस्वीर पेश कर रहा है।
