Uttrakhand

अंकिता भंडारी केस के बीच दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने पर घमासान, गणेश गोदियाल ने सरकार से सीधे सवाल.

अंकिता को न्याय कब? दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर कांग्रेस का विरोध, गांधी पार्क में मौन उपवास करेंगे गणेश गोदियाल

 

देहरादून।

 

भारत केसरी

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। गोदियाल ने सवाल उठाया है कि जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय और सीबीआई जांच को लेकर सवाल बने हुए हैं, तो ऐसे समय में यह नियुक्ति क्या संदेश देती है?

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 12 अक्टूबर 2026 को राज्यपालों के फेरबदल के तहत दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में इसकी पुष्टि की गई है।

 

गणेश गोदियाल ने उठाए गंभीर सवाल

 

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि अंकिता भंडारी के माता-पिता ने कथित वीआईपी का नाम लिया था और इस मामले में अब तक जांच की प्रगति को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं। गोदियाल ने आरोप लगाया कि सीबीआई जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है और उनके अनुसार नामजद व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है।

 

इन आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच की वर्तमान स्थिति क्या है? क्या जांच एजेंसी ने सभी आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्षता से पड़ताल की है? और यदि जांच में कोई कमी या देरी है, तो उसकी जवाबदेही किसकी है?

सरकार से सीधे सवाल—न्याय की मांग का जवाब कौन देगा?

 

उत्तराखंड की जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि जांच की स्थिति और तथ्यों को सार्वजनिक करने से मिलना चाहिए।

 

क्या सरकार और संबंधित जांच एजेंसी स्पष्ट करेंगी कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है? क्या कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों की जांच का निष्कर्ष जनता के सामने रखा जाएगा? और क्या अंकिता भंडारी के माता-पिता को उन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे, जिनकी वे लगातार मांग कर रहे हैं?

 

यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि राज्यपाल की नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया के तहत की जाती है, जबकि किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। ऐसे में राजनीतिक आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

 

कल गांधी पार्क में मौन उपवास

 

गणेश गोदियाल ने घोषणा की है कि वह 13 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे देहरादून के गांधी पार्क स्थित गांधी प्रतिमा के सामने एक घंटे का मौन उपवास करेंगे। उन्होंने इसे अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग और दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति के विरोध में प्रतिकारात्मक कदम बताया है।

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अब देखना होगा कि इस विरोध के बाद सरकार और संबंधित जांच एजेंसी की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग के बीच प्रदेश की जनता के सवालों का जवाब जांच की पारदर्शिता, ठोस तथ्यों और जवाबदेही से ही मिल सकता है।