पीपलकोटी टनल हादसा: 7 मजदूरों की मौत, 19 रेस्क्यू; 3 अब भी लापता, CM धामी ने संभाला मोर्चा
चमोली , भारत केसरी
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के मायापुर (पीपलकोटी) में टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीआरटी टनल में हुए दर्दनाक हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। गुरुवार शाम करीब 7:05 बजे टनल के भीतर अचानक मलबा और पानी भरने से 22 मजदूर फंस गए थे। हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत की सूचना है, जबकि 19 लोगों को टनल से बाहर निकाला जा चुका है। वहीं 3 मजदूर अब भी लापता हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहद खराब मौसम के बीच पीपलकोटी पहुंचे और घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने टनल के अंदर जाकर रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति देखी और बचाव दलों से मौके पर जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि टनल में फंसे तीनों श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
1.5 किलोमीटर अंदर आया मलबा और पानी
टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना की टीआरटी टनल की लंबाई करीब 3 किलोमीटर है। प्रशासन के मुताबिक टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भू-धंसाव के कारण अचानक मलबा और पानी आने की स्थिति बनी।
घटना के बाद तत्काल SDRF, NDRF, ITBP, पुलिस, प्रशासन और टीएचडीसी की टीमें मौके पर पहुंचीं। टनल के अंदर मलबे और पानी की चुनौती के बीच बचाव दल अत्यंत सावधानी और तकनीकी विशेषज्ञता के साथ अभियान चला रहे हैं।
प्रारंभिक तौर पर टनल के भीतर किसी कैविटी बनने की वजह से पानी और मलबे के अचानक रिसाव की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
22 में से 19 लोग बाहर, 3 की तलाश जारी
जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार के मुताबिक टनल में कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी। रातभर चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद अब तक 19 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है।
रेस्क्यू किए गए घायलों को जिला चिकित्सालय गोपेश्वर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। वहीं तीन मजदूरों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमों का अभियान लगातार जारी है।
रेस्क्यू अभियान में सहयोग के लिए टनल के भीतर गए छह बचावकर्मी भी सुरक्षित बताए गए हैं। 
सात मजदूरों की मौत
हादसे में अब तक सात मजदूरों की मौत की सूचना है। मृतकों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के श्रमिक शामिल हैं।
मृतकों में शामिल हैं:
- प्रदीप पंवार, 31 वर्ष, टिहरी गढ़वाल
- मुकेश सिंह, चमोली
- दुर्लभ शर्मा, उत्तर प्रदेश
- विजय हंसदा, उत्तर प्रदेश
- जितेंद्र कुमार, उत्तर प्रदेश
- लोकेश्वर, छत्तीसगढ़
- भुनेश्वर, छत्तीसगढ़
प्रशासन के अनुसार मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सहायता एवं मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
तीन मजदूर अब भी लापता
रेस्क्यू टीमों की सबसे बड़ी चुनौती अब टनल के भीतर फंसे तीन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
लापता मजदूरों के नाम:
- लुकास टोपनो, झारखंड
- चेतन पोयाम, छत्तीसगढ़
- देवनाथ, छत्तीसगढ़
टनल में पानी और मलबे की स्थिति को देखते हुए बचाव दल हर कदम बेहद सावधानी से उठा रहे हैं।
CM धामी ने टनल के अंदर जाकर लिया जायजा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खराब मौसम के बीच पीपलकोटी पहुंचे। प्रतिकूल मौसम के कारण हेलीकॉप्टर की लैंडिंग भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई। इसके बावजूद मुख्यमंत्री सीधे घटनास्थल पहुंचे और रेस्क्यू अभियान का स्थलीय निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने टनल के अंदर जाकर बचाव एवं राहत कार्यों का जायजा लिया और रेस्क्यू टीमों से ऑपरेशन की प्रगति की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपलब्ध सभी संसाधनों और तकनीकी विशेषज्ञता का प्रभावी उपयोग करते हुए शेष तीन मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए।
टीएचडीसी गेस्ट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक
घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री ने पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी गेस्ट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।
उन्होंने NDRF, SDRF, ITBP, पुलिस, जिला प्रशासन और THDC के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही रेस्क्यू टीमों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा।
मुख्यमंत्री ने टनल की तकनीकी स्थिति, जल निकासी और मलबा हटाने के कार्य की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए।
घायल श्रमिकों से अस्पताल में मिले CM
रेस्क्यू अभियान का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचे और बाहर निकाले गए घायल श्रमिकों से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों से उनके स्वास्थ्य और उपचार के बारे में जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से भी अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली और निर्देश दिए कि घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की जान सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और उपलब्ध सभी संसाधनों का उपयोग श्रमिकों को बचाने के लिए किया जा रहा है।
परिजनों को समय पर सूचना, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि हादसे से प्रभावित श्रमिकों के परिजनों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने के लिए संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी उन्होंने स्वयं बातचीत की है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने टनल हादसे के कारणों की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और टनल के अंदर अचानक पानी व मलबा कैसे आया, इसका पता लगाया जाएगा।
आपदा प्रबंधन मंत्री ने भी लिया जायजा
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने भी हादसे के बाद आपदा प्रबंधन विभाग पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता टनल में फंसे तीनों मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
उन्होंने हादसे में मृतकों के परिजनों को आपदा नियमों के तहत चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही। घायलों के इलाज और अन्य सहायता की कार्रवाई भी निर्धारित मानकों के अनुसार किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
IRS सिस्टम सक्रिय, सभी एजेंसियां एक साथ जुटीं
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं DIG राजकुमार नेगी के अनुसार घटना की सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन का इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) सक्रिय कर दिया गया।
SDRF, NDRF, ITBP, पुलिस, प्रशासन, THDC और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चला रही हैं।
टनल के भीतर मलबा और पानी लगातार चुनौती बना हुआ है, लेकिन बचाव दलों द्वारा उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के माध्यम से ऑपरेशन को आगे बढ़ाया जा रहा है।
चमोली में लगातार बढ़ रही आपदा की चुनौती
पीपलकोटी टनल हादसे ने एक बार फिर चमोली जिले की आपदा संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। पिछले कुछ वर्षों में चमोली में कई बड़ी प्राकृतिक और भूगर्भीय आपदाएं हुई हैं।
रैणी आपदा, जोशीमठ भू-धंसाव और तमकनाला में आई आपदा जैसी घटनाओं ने जिले की संवेदनशीलता को उजागर किया है।
जनवरी 2023 में जोशीमठ में भू-धंसाव के बाद सैकड़ों भवनों में दरारें सामने आई थीं। हालात बिगड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा और असुरक्षित घोषित किए गए भवनों को ध्वस्त किया गया।
वहीं रैणी क्षेत्र में आई भीषण आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। हाल में तमकनाला क्षेत्र में भारी मलबे और पानी के कारण बैली ब्रिज बह गया था, जिससे जोशीमठ-मलारी हाईवे भी प्रभावित हुआ था।
अब तीन जिंदगियों को बचाने की चुनौती
पीपलकोटी टनल हादसे में 22 लोगों के फंसने से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन अब अंतिम चरण की सबसे बड़ी चुनौती के सामने है। 19 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, सात लोगों की मौत हो चुकी है और तीन मजदूर अब भी लापता हैं।
मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन और तमाम बचाव एजेंसियां घटनास्थल पर डटी हुई हैं। खराब मौसम, पानी और मलबे के बीच रेस्क्यू टीमों की कोशिश अब इसी उम्मीद पर टिकी है कि टनल के भीतर फंसे तीनों मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
फिलहाल सरकार और रेस्क्यू एजेंसियों का एक ही लक्ष्य है—टनल में फंसी हर जिंदगी को सुरक्षित बाहर लाना।
