राष्ट्रपति पदक की दौड़ से बाहर उत्तराखंड , पुलिस मुख्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
देहरादून।
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय (PHQ) की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले राष्ट्रपति एवं अन्य केंद्रीय पुलिस पदकों के लिए केंद्र की ओर से राज्यों से नाम मांगे गए थे, लेकिन आरोप है कि उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय तय समयसीमा के भीतर एक भी नाम केंद्र को नहीं भेज सका।

बताया जा रहा है कि निर्धारित समय सीमा के दौरान पुलिस मुख्यालय स्तर पर नाम भेजने की प्रक्रिया में देरी होती रही और जब तक प्रस्ताव भेजने की कार्रवाई शुरू की गई, तब तक केंद्र का ऑनलाइन पोर्टल बंद हो चुका था। इसके चलते 25 हजार से अधिक जवानों की मजबूत पुलिस फोर्स वाले उत्तराखंड से इस वर्ष केंद्रीय पदकों के लिए कोई नाम नहीं भेजा जा सका।

मामले ने PHQ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब केंद्र सरकार ने समय रहते पदकों के लिए नाम मांगे थे, तो पुलिस मुख्यालय स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर समयसीमा के भीतर क्यों नहीं भेजे गए?
मीटिंग पर मीटिंग, लेकिन जरूरी काम रह गया पीछे
आरोप है कि पुलिस मुख्यालय में अधिकारी लगातार बैठकों में व्यस्त रहे। एक बैठक खत्म होने के बाद दूसरी बैठक शुरू होने की स्थिति के बीच पदकों के लिए नाम भेजने जैसे महत्वपूर्ण कार्य में कथित तौर पर लापरवाही हुई।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारियों और जवानों की उत्कृष्ट सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने से जुड़ा विषय था।
होमगार्ड और जेल विभाग ने भेजे नाम
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसी प्रक्रिया में होमगार्ड और जेल विभाग ने समय पर अपने कर्मचारियों के नाम शासन को भेज दिए। परिणामस्वरूप इन विभागों के कर्मचारियों को केंद्रीय स्तर पर सेवा पदक की दौड़ में शामिल होने का अवसर मिला।
इसके विपरीत पुलिस विभाग, जो राज्य की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण वर्दीधारी फोर्स में शामिल है, वहां से एक भी नाम केंद्र तक नहीं पहुंच पाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जिम्मेदारी किसकी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस कथित प्रशासनिक चूक की जिम्मेदारी आखिर किस अधिकारी की तय होगी? क्या पूरे मामले की जांच कर यह निर्धारित किया जाएगा कि समयसीमा के भीतर नाम क्यों नहीं भेजे गए?
यदि लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी बैठकों और फाइलों के बीच दबकर रह जाएगा?
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय की इस कथित चूक ने न केवल उत्कृष्ट सेवा देने वाले पुलिसकर्मियों को पदक की दौड़ से बाहर किया है, बल्कि राज्य की प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि शासन और पुलिस मुख्यालय इस मामले में क्या जवाब देता है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

