वंदे मातरम को लेकर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, महेंद्र भट्ट बोले- सम्मान से समझौता नहीं
देहरादून, 24 अगस्त।
भारत केसरी
वंदे मातरम को लेकर उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए इसे विभाजनकारी राजनीति से प्रेरित बताया है। भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में भट्ट ने कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान और उसके गायन के अधिकार को लेकर पार्टी किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।

महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम के केवल दो छंदों के गायन के फैसले का भाजपा विरोध करती है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय चेतना और भारत माता के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वंदे मातरम के इतिहास, अर्थ और गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भाजपा जनजागरण अभियान चलाएगी। खासतौर पर युवाओं के बीच राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए महेंद्र भट्ट ने कहा कि हरीश रावत वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें अपने कार्यकर्ताओं को वंदे मातरम के सम्मान के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग पूरा राष्ट्रगीत नहीं गा सकते, वे कम से कम उसके सम्मान में खड़े तो हो सकते हैं।
भट्ट ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान, देशभक्ति और देश की अखंडता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान किसी राजनीतिक दल या वोट बैंक की राजनीति से ऊपर होना चाहिए।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि पार्टी अपने आगामी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सम्मान को लेकर अभियान चलाएगी और इसके इतिहास एवं महत्व को जनता तक पहुंचाएगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रगीत किसी एक दल की संपत्ति नहीं है और इसका सम्मान राजनीतिक या चुनावी गणित से ऊपर होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी अपने आगामी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सम्मान और उसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर लोगों के बीच जाएगी।
प्रेसवार्ता में प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी और हनी पाठक समेत पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

