Uttrakhand

हल्द्वानी शुद्धीकरण विवाद पर करन माहरा का बीजेपी पर हमला, बोले- दलित नेता का अपमान सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वालों का अपमान

देहरादून: हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल के कथित तौर पर गंगाजल से शुद्धीकरण किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में कांग्रेस नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े लोगों पर तीखा हमला बोला है।

उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य करन माहरा ने कहा कि देश के वरिष्ठ नेताओं में शामिल और दलित समाज से आने वाले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद मंच को गंगाजल से धोने की घटना केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि करोड़ों दलितों और सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले लोगों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।

 

करन माहरा ने सवाल उठाया कि आखिर किस सोच के तहत किसी दलित नेता की मौजूदगी के बाद किसी स्थान को शुद्ध करने की आवश्यकता महसूस की गई।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक समरसता और समानता के दावों पर सवाल खड़े करती हैं।

‘संविधान सभी नागरिकों को देता है समान अधिकार’

करन माहरा ने कहा कि भारतीय संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करता है। ऐसे में जाति के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव किए जाने की सोच संविधान की मूल भावना के विपरीत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाएं उस मानसिकता को उजागर करती हैं, जिसमें आज भी जाति के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव किया जाता है।

माहरा ने कहा कि भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यही उसका सामाजिक समरसता और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का मॉडल है।

बीएल संतोष के बयान का भी किया जिक्र

कांग्रेस नेता करन माहरा ने भाजपा नेता बीएल संतोष के उस कथित बयान का भी उल्लेख किया, जिसे लेकर दलितों और ब्राह्मण समाज के बीच मतभेद पैदा करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करने वाली राजनीति को बढ़ावा दे सकते हैं और राजनीतिक दलों को सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की दिशा में जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।

‘जाति के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति से जनता ऊब चुकी है’

करन माहरा ने कहा कि देश की जनता जाति के आधार पर समाज को बांटने वाली राजनीति से अब ऊब चुकी है।

उन्होंने कहा कि दलित, ब्राह्मण, पिछड़ा और सवर्ण—सभी देश के नागरिक हैं और संविधान की नजर में सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों को जाति के नाम पर लोगों के बीच दूरी पैदा करने के बजाय सामाजिक भाईचारे और समानता को मजबूत करने का काम करना चाहिए।

‘मानसिकता का शुद्धीकरण करने की जरूरत’

करन माहरा ने कहा कि मंचों या स्थानों के शुद्धीकरण की बजाय उस सोच में बदलाव की जरूरत है, जो जाति और सामाजिक पहचान के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव पैदा करती है।

उन्होंने कहा कि देश बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के सिद्धांतों के अनुसार चलेगा और समानता, सामाजिक न्याय तथा भाईचारा भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना हैं।

करन माहरा ने कहा कि सामाजिक सम्मान, समानता और भाईचारे की लड़ाई जारी रहेगी और जनता नफरत तथा भेदभाव की राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।