हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर कांग्रेस का हल्ला बोल, देहरादून में सचिवालय घेराव; पुलिस से धक्का-मुक्की के बाद नेता-कार्यकर्ता हिरासत में
देहरादून, 1 सितंबर 2026: हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद कथित तौर पर हुए ‘शुद्धिकरण’ प्रकरण के विरोध में उत्तराखंड कांग्रेस ने मंगलवार को राजधानी देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन से सचिवालय तक मार्च करते हुए सचिवालय का घेराव किया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की और कहासुनी हुई। इसके बाद पुलिस ने कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया।

हल्द्वानी प्रकरण को लेकर कांग्रेस का आक्रोश
कांग्रेस का प्रदर्शन हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त 2026 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद कथित रूप से किए गए ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ के विरोध में किया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह घटना राजनीतिक विरोध से आगे बढ़कर सामाजिक और जातिगत अपमान का विषय बन गई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में किसी राजनीतिक दल या नेता की सभा के बाद उस स्थान को ‘शुद्ध’ करने की बात क्या स्वीकार्य हो सकती है?
“भाजपा बताए, क्या यह मानसिकता स्वीकार्य है?” — गोदियाल
गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस जानना चाहती है कि आखिर वह कौन-सी मानसिकता है, जो देश के वरिष्ठ दलित नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा संबोधित सभा के बाद उसी स्थान को ‘अशुद्ध’ बताने का प्रयास करती है।
उन्होंने भाजपा से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि यदि पार्टी इस तरह की सोच का समर्थन नहीं करती तो संबंधित लोगों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस संविधान, सामाजिक समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।
यशपाल आर्य बोले—सामाजिक न्याय की भावना पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि हल्द्वानी की घटना केवल किसी राजनीतिक दल का अपमान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान की मूल भावना पर सवाल खड़ा करती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सामाजिक पहचान या जाति के आधार पर उसके कार्यक्रम के बाद किसी स्थान को ‘अशुद्ध’ बताने वाली मानसिकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यशपाल आर्य ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से उठाएगी।
प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत ने भी साधा निशाना
चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि राजनीतिक विरोध और सामाजिक अपमान में अंतर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि खड़गे की सभा के बाद ‘शुद्धिकरण’ जैसा आयोजन महज राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
वहीं चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान सामाजिक समरसता और भाईचारे से रही है। उन्होंने भाजपा से इस पूरे मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
कांग्रेस के सह-प्रभारी मनोज यादव और अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय की भावना से जोड़ते हुए कथित घटना की आलोचना की।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र शर्मा ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कथित रूप से ‘शुद्धिकरण’ करने वाले लोगों की भूमिका की जांच करते हुए दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट पर भी निशाना साधते हुए भाजपा से स्पष्ट करने की मांग की कि वह संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के साथ खड़ी है या सामाजिक भेदभाव की कथित मानसिकता के साथ।
सचिवालय कूच के दौरान पुलिस से टकराव
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस भवन से सचिवालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया।
“यह केवल राजनीतिक प्रदर्शन नहीं”—कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि सचिवालय घेराव केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संघर्ष है।
कांग्रेस ने सरकार से हल्द्वानी प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की जनता विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों का समाधान चाहती है और समाज को जाति एवं धर्म के नाम पर बांटने वाली राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी।
