DEHRADUN

बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त पहल, स्कूलों में स्थायी हेल्प डेस्क बनाने के निर्देश

देहरादून के स्टारलैंड विद्यालय में सुरक्षित बचपन जागरूकता शिविर आयोजित, POCSO कानून, सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श और साइबर अपराधों से बचाव की दी जानकारी

देहरादून, 30 अक्टूबर। बच्चों को बाल अधिकारों, कानूनी संरक्षण और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून की ओर से शुक्रवार को नेहरू कॉलोनी स्थित स्टारलैंड विद्यालय में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। ‘सुरक्षित बचपन जागरूकता अभियान’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को बाल शोषण, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार से बचाव के उपाय बताए गए। साथ ही, बच्चों की समस्याओं के त्वरित समाधान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विद्यालय में स्थायी हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए गए।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर का नेतृत्व अपर जिला जज पंचम अंजली बेंजवाल ने किया। इस दौरान विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), बाल अधिकारों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।

सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श और साइबर सुरक्षा पर जोर

शिविर में बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर समझाते हुए बताया गया कि किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार, शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देना जरूरी है। विद्यार्थियों को इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित इस्तेमाल करने तथा साइबर अपराधों से बचने के उपायों के बारे में भी जागरूक किया गया।

अपर जिला जज अंजली बेंजवाल ने बच्चों को अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना या समस्या की स्थिति में बच्चों को बिना झिझक अपने अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को जानकारी देनी चाहिए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जरूरी हेल्पलाइन नंबरों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया।

विद्यालय में दो महिला और दो पुरुष शिक्षकों का पैनल बनेगा

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में हेल्प डेस्क स्थापित की गई, जहां छात्र-छात्राओं को विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करने का अवसर मिला।

अपर जिला जज ने विद्यालय की प्रधानाचार्या को निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए दो महिला और दो पुरुष शिक्षक-शिक्षिकाओं का पैनल गठित किया जाए। इसके साथ ही विद्यालय में स्थायी हेल्प डेस्क स्थापित करने को कहा गया, ताकि विद्यार्थी अपनी समस्याएं बिना किसी डर या संकोच के साझा कर सकें और उन्हें समय पर सहायता मिल सके।

विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

जागरूकता शिविर में साइबर सेल से शिल्पा सैनी, जिला बाल संरक्षण इकाई से रश्मि बिष्ट, पैनल अधिवक्ता नूपुर मित्तल, प्राविधिक कार्यकर्ता कुलवीर सिंह तड़ियाल और किशोर जोशी सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, शिक्षक तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

अभियान के माध्यम से बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने, शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।