राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर सियासत तेज, भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार
देहरादून: कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कार्यक्रम स्थल को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। जहां भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक ड्रामा करने का आरोप लगाया है, वहीं कांग्रेस ने प्रशासन पर सरकार के दबाव में कार्यक्रम में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि यदि कांग्रेस का उद्देश्य वास्तव में छात्रों से संवाद करना है तो कार्यक्रम किसी भी स्थान पर आयोजित किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने और अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रही है। भट्ट ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी का यह कार्यक्रम पूरी तरह पूर्व नियोजित है, जिसमें प्रतिभागियों से लेकर सवाल और जवाब तक पहले से तय हैं।

वहीं कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परेड ग्राउंड में कार्यक्रम के लिए निर्धारित शुल्क जमा कर विधिवत अनुमति पहले ही प्राप्त की जा चुकी है। कांग्रेस के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को नगर निगम के निर्देशानुसार 15 से 17 जुलाई 2026 तक परेड ग्राउंड आरक्षित कराने के लिए ₹1.77 लाख का शुल्क आरटीजीएस के माध्यम से जमा किया गया था और इसकी रसीद भी पार्टी के पास उपलब्ध है।
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कांग्रेस का आरोप है कि शुल्क जमा होने और मैदान आरक्षित होने के बावजूद प्रशासन अब केवल मौखिक रूप से कार्यक्रम स्थल बदलने की बात कर रहा है, जबकि इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। पार्टी का कहना है कि जब तक कोई लिखित निर्देश नहीं मिलता, कार्यक्रम पूर्व निर्धारित स्थल पर ही आयोजित किया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर राहुल गांधी की लोकप्रियता से घबराकर कार्यक्रम में व्यवधान डालने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि यदि आरक्षित अवधि शुरू होने के बावजूद प्रशासन मैदान उपलब्ध नहीं कराता है तो इसे प्रशासनिक तानाशाही माना जाएगा।
इसी क्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कार्यकर्ताओं से 14 जुलाई की रात 11 बजे राजीव भवन पहुंचने और वहां से परेड ग्राउंड जाकर पंडाल निर्माण कार्य शुरू कराने में सहयोग करने की अपील की है।
फिलहाल कार्यक्रम स्थल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रशासन की ओर से इस विवाद पर आधिकारिक लिखित आदेश या विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबकी नजरें 17 जुलाई को प्रस्तावित राहुल गांधी के कार्यक्रम और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

