डीएम आशीष चौहान का सख्त एक्शन, ड्रग्स तस्करों की सप्लाई चेन तोड़ने के निर्देश
देहरादून: युवाओं को नशे के दलदल से बचाने के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति (एनसीओआरडी) की बैठक में अधिकारियों को नशे के हॉटस्पॉट क्षेत्रों का जीआईएस विश्लेषण कर तस्करों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

डीएम ने कहा कि नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और ड्रग्स की सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा। इसके लिए पुलिस, एसटीएफ, एएनटीएफ, एनसीबी और औषधि विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाएंगे। साथ ही मेडिकल स्टोर, चाय-तंबाकू की दुकानें, स्लम बस्तियां और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
बैठक में डीएम ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एंटी-ड्रग्स, साइबर अपराध और वित्तीय अपराध से जुड़े विषयों पर जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। छात्रावासों, पीजी और कोचिंग संस्थानों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने तथा एंटी-ड्रग्स हेल्पलाइन 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को भी कहा गया।
नशा मुक्ति केंद्रों की समीक्षा में सामने आया कि जिले के 84 पंजीकृत और 2 अपंजीकृत केंद्रों के सत्यापन में 23 केंद्र बंद मिले, जबकि 15 केंद्रों में अनियमितताएं पाई गईं। डीएम ने ऐसे केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और सेलाकुई में 30 बेड क्षमता वाले नए नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र का प्रस्ताव शासन को भेजने को कहा।
पुलिस विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 151 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 170 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों में 711 संदिग्ध छात्रों की ड्रग्स टेस्टिंग कराई गई, जिनकी सभी रिपोर्टें नकारात्मक आई हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और परिवारों की खुशियों को बचाने का अभियान है। प्रशासन का लक्ष्य है कि नशे के कारोबार से जुड़े हर नेटवर्क को तोड़कर देहरादून को नशा मुक्त बनाया जाए।
