2006 से बंद भर्ती का दरवाजा खुलवाने सड़कों पर उतरे शारीरिक शिक्षा शिक्षक, शिक्षा मंत्री आवास घेराव से सरकार को घेरा
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2006 से शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता बंद होने के विरोध में प्रशिक्षित बेरोजगार शारीरिक शिक्षा शिक्षकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य विषय बनाए जाने के बावजूद प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने को लेकर बेरोजगारों में भारी आक्रोश है।
शारीरिक शिक्षा शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पांडेय के नेतृत्व में आंदोलनरत शिक्षकों ने रविवार को शिक्षा मंत्री के आवास घेराव का ऐलान किया। इससे पहले शिक्षक शिक्षा निदेशालय, ननूरखेड़ा में 4 जून से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आंदोलन का आज 74वां दिन है, जबकि क्रमिक अनशन को भी 59 दिन पूरे हो चुके हैं।
74 दिन से धरना, फिर भी सरकार की ओर से नहीं हुई पहल
आंदोलनकारियों का कहना है कि इतने लंबे समय से धरना और क्रमिक अनशन जारी रहने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका आरोप है कि किसी अधिकारी या जिम्मेदार प्रतिनिधि ने आंदोलनकारियों की सुध तक नहीं ली।
शिक्षकों का कहना है कि नई शिक्षा नीति के तहत शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य विषय का दर्जा दिया जा चुका है और उत्तराखंड में भी इसे लागू किया गया है। इसके बावजूद विद्यालयों में प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होना सरकार की नीति और जमीनी व्यवस्था के बीच बड़ा विरोधाभास है।
‘हर विद्यालय में शारीरिक शिक्षक’ का वादा याद दिलाया
आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पूर्व के उस आश्वासन का भी हवाला दिया, जिसमें भाजपा सरकार बनने पर प्रत्येक विद्यालय में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कदम उठाने की बात कही गई थी।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार बनने के बाद भी नियुक्तियों का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि वर्षों से प्रशिक्षित बेरोजगार शिक्षक नौकरी की उम्मीद में आंदोलन कर रहे हैं, जबकि विद्यालयों में बच्चों को शारीरिक शिक्षा का लाभ पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रहा है।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
शारीरिक शिक्षा शिक्षक संगठन ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं—
- प्राथमिक से इंटरमीडिएट स्तर तक प्रत्येक विद्यालय में एक शारीरिक शिक्षक की अनिवार्य नियुक्ति की जाए।
- राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों में शारीरिक शिक्षा के प्रवक्ता पद सृजित किए जाएं।
- उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक पद से संबंधित फाइल संख्या 77006 को वित्त विभाग से मंजूरी दिलाकर कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाए।
- शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को आयु सीमा में छूट प्रदान की जाए।
‘निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज’
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा आत्मघाती कदम उठाए जाने की चेतावनी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को संवाद व सुरक्षित समाधान की दिशा में तत्काल पहल करनी चाहिए।
शिक्षकों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल रोजगार की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यालयों में बच्चों को अनिवार्य शारीरिक शिक्षा उपलब्ध कराने से भी जुड़ा है।
प्रदेशभर से पहुंचे शिक्षक
शिक्षा मंत्री आवास घेराव कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिक्षक और प्रशिक्षित बेरोजगार शामिल हुए। इनमें प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पांडेय, महेश नेगी, भुवनेश बिष्ट, प्रकाश चंद्र, संजय कोरंगा, प्रदीप नेगी, योगेंद्र नेगी, शशि प्रकाश नेगी, दीपक जोशी, धनपाल, अनिल राज, यशपाल गोसाईं, आलोक शाह, वीरेंद्र खंडूरी, महावीर सिंह, गोविंद, प्रवीण राजपूत, मेहरबान अली, अकरम अली, विकास सैनी, सुशीला देवी, मोमिन अहमद, महेंद्र रावत, अनूप तिवारी, संदीप चमोली, सुमन सिंह, सुनील नैनवाल, सुभाष मंडल, सत्यवीर, मोहन स्वरूप और मंजू रानी सहित कई शिक्षक शामिल रहे।
शारीरिक शिक्षा शिक्षक संगठन उत्तराखंड ने सरकार से मांग की है कि वर्षों से लंबित नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द शुरू कर प्रशिक्षित बेरोजगारों को रोजगार का अवसर दिया जाए।

