मालदेवता की सास-बहू की जोड़ी ने राखी कारोबार में मचाई धूम, 1,500 राखियां तैयार
देहरादून, 21 अगस्त 2026।
भारत केसरी
रक्षाबंधन से पहले देहरादून की ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार मिल रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर स्वरोजगार की नई मिसाल पेश कर रही हैं। रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाओं द्वारा तैयार राखियों की मांग लगातार बढ़ रही है।

सबसे खास कहानी रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू लीला रावत और अलका रावत की है। दोनों ने मिलकर राखी निर्माण को कारोबार का रूप दिया है। नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दोनों महिलाओं ने इस वर्ष 2 हजार से अधिक राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जबकि अब तक करीब 1,500 राखियां तैयार की जा चुकी हैं।
पिछले साल 1,200 राखियों से कमाया 25 हजार का मुनाफा
लीला और अलका ने पिछले साल करीब 1,200 हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर बाजार में बेची थीं। इससे उन्हें करीब 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। बेहतर बाजार मिलने और कारोबार से उत्साहित होकर इस वर्ष उन्होंने उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया।
प्राइवेट नौकरी छोड़ी, सास के साथ शुरू किया कारोबार
अलका रावत ने पिछले वर्ष प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला के साथ स्वरोजगार का रास्ता चुना। दोनों ने मालदेवता में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान शुरू की। यहां राखियों के अलावा अन्य हस्तनिर्मित और स्थानीय उत्पाद भी तैयार कर बेचे जा रहे हैं।
अब इस कारोबार को डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी सहारा मिल रहा है। इंस्टाग्राम के जरिए भी ग्राहकों से राखियों के ऑर्डर मिल रहे हैं। यानी मालदेवता की इन महिलाओं का कारोबार स्थानीय बाजार से निकलकर ऑनलाइन बाजार तक पहुंच चुका है।
पारंपरिक से आधुनिक डिजाइन तक तैयार हो रहीं राखियां
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ऊन, क्रोशिया, मौली, रिबन समेत अलग-अलग सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष और नजरबट्टू जैसे डिजाइन लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। खास बात यह है कि राखियों की डिजाइनिंग से लेकर पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार तक का काम महिलाएं खुद कर रही हैं।
लीला रावत वर्ष 2016 से एनआरएलएम से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि स्वयं सहायता समूह और सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत होने का अवसर दिया है।
जिले के दूसरे ब्लॉकों में भी राखी कारोबार ने पकड़ी रफ्तार
रायपुर के अलावा सहसपुर और डोईवाला की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी बड़े स्तर पर राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला की करीब 100 महिलाएं विभिन्न डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं, जिन्हें रायवाला और श्यामपुर के बाजारों में स्टॉल लगाकर बेचा जा रहा है।
वहीं सहसपुर विकासखंड के सक्षम क्लस्टर की महिलाओं की राखियों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है और सेलाकुई, सहसपुर व विकासनगर क्षेत्र में भी उन्हें बाजार मिल रहा है।
दून के मॉल और सचिवालय में लगेंगे स्टॉल
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह के मुताबिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से देहरादून के तीन से चार प्रमुख मॉल में राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे।
इसके अलावा 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों पर राखियों के साथ पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की भी प्रदर्शनी एवं बिक्री होगी।
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियों और स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करें।
