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अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़: गणेश गोदियाल

देहरादून। अग्निवीर योजना को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे युवाओं के भविष्य को अनिश्चित करने वाली व्यवस्था बताया है। गुरुवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने अग्निवीर योजना को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित दीपोत्सव को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याओं के बीच दीपोत्सव के नाम पर हजारों टन तेल खर्च किया जा रहा है। गोदियाल ने कहा कि यदि जनता अपने कामों से खुश होकर दीप जलाती तो बात अलग होती।

चार साल बाद युवाओं के भविष्य पर सवाल

गोदियाल ने कहा कि देश के लाखों युवा सेना में स्थायी नौकरी की उम्मीद लेकर वर्षों तक भर्ती की तैयारी करते हैं, लेकिन अग्निवीर व्यवस्था में अधिकांश युवाओं का सैन्य करियर चार वर्ष बाद समाप्त हो जाता है। उनका कहना था कि 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती होने वाला युवा चार वर्ष बाद लगभग 21-22 वर्ष की उम्र में फिर रोजगार की तलाश में खड़ा हो सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि इतने कम समय में युवा अपने परिवार और भविष्य को किस तरह सुरक्षित कर पाएगा। कांग्रेस ने स्थायी सैनिकों और अग्निवीरों के बीच सेवा अवधि, वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के अंतर को लेकर भी सवाल उठाए।

गोदियाल ने कहा कि सेना केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनभर की जिम्मेदारी, अनुशासन और सम्मान से जुड़ा संस्थान है। उनके अनुसार सेना में अनुभव और विशेषज्ञता लंबे समय की सेवा से विकसित होती है।

उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष असर: प्रीतम सिंह

चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं और सैन्य परिवारों पर विशेष प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा लंबे समय से गौरवशाली रही है और पहाड़ी क्षेत्रों के हजारों परिवारों के लिए सेना रोजगार के साथ सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा का आधार भी रही है।

प्रीतम सिंह ने कहा कि आज युवा चार साल की नौकरी के बजाय स्थायी और सुरक्षित रोजगार चाहता है। प्रतियोगी परीक्षाओं और बेरोजगारी के दौर में युवा वर्षों तक तैयारी करता है। ऐसे में चार साल की सेवा के बाद दोबारा रोजगार की तलाश करना उसके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की ठोस व्यवस्था क्या है। उन्होंने यह भी पूछा कि नियमित सेवा में सीमित संख्या में चयन के बाद बाकी युवाओं के लिए स्थायी रोजगार का रोडमैप क्या है।

वास्तविक नियुक्तियों का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग

डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि केवल अलग-अलग विभागों में आरक्षण या प्राथमिकता की घोषणा पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक कितने अग्निवीरों को सेवा समाप्त होने के बाद स्थायी सरकारी रोजगार मिला है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सैन्य बहुल राज्य है और यहां बड़ी संख्या में परिवार सेना से जुड़े हुए हैं। ऐसे में भर्ती व्यवस्था में होने वाले बदलाव का असर युवाओं और सैन्य परिवारों की भावनाओं पर भी पड़ता है।

रावत ने कहा कि सेना की भर्ती को रोजगार के आंकड़े सुधारने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। सेना का उद्देश्य मजबूत, प्रशिक्षित और अनुभवी सैन्य बल तैयार करना होना चाहिए।

 

 

कांग्रेस ने उठाए कई सवाल

पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सरकार से अग्निवीर योजना को लेकर कई सवाल किए। इनमें चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले युवाओं के रोजगार की व्यवस्था, उच्च शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग शामिल रही।

कांग्रेस ने नियमित सेना भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने, रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने और युवाओं को पर्याप्त भर्ती अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही उत्तराखंड जैसे सैन्य बहुल राज्य के लिए विशेष भर्ती नीति और अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए अलग पैकेज की मांग भी उठाई गई।

80 हजार से घटकर 47 हजार भर्ती का दावा

सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने दावा किया कि पहले करीब 80 हजार युवाओं को प्रतिवर्ष सेना में रोजगार मिलता था, जो अब घटकर करीब 47 हजार रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि इनमें से 25 प्रतिशत युवाओं को ही स्थायी रूप से सेना में लिया जाता है तो करीब 12 हजार युवाओं को ही नियमित सेवा का अवसर मिलेगा।

उन्होंने सरकार से चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए रोजगार, उच्च शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण की ठोस व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही उन्होंने पूछा कि अब तक कितने अग्निवीरों को स्थायी सरकारी रोजगार मिला है और सेना में नियमित भर्ती के रिक्त पद कब तक भरे जाएंगे।

कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि उत्तराखंड के कितने युवाओं ने अग्निवीर योजना के माध्यम से सेना में भर्ती पाई और उनमें से कितनों को आगे नियमित सेवा में स्थान मिला।

स्वतंत्र समीक्षा की मांग

कांग्रेस नेताओं ने अग्निवीर योजना की स्वतंत्र समीक्षा कराने और भविष्य में अग्निवीरों को सम्मानजनक सेवा-सुरक्षा उपलब्ध कराने पर सरकार से विचार करने की मांग की।

गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस का विरोध सेना या सैनिकों से नहीं, बल्कि ऐसी भर्ती व्यवस्था से है, जिसे पार्टी युवाओं के भविष्य को अनिश्चित करने वाली मानती है। उन्होंने कहा कि सरकार को चार वर्ष की सेवा के बाद अग्निवीरों के रोजगार और भविष्य की स्पष्ट गारंटी देनी चाहिए।

पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।