राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग से जुड़े विषयों को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित
देहरादून : राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से आधुनिक गर्भनिरोधक सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 9 और 10 मार्च को सबडर्मल कॉन्ट्रासेप्टिव यानी इम्प्लांट सिंगल रॉड पर दो दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स की कार्यशाला का आयोजन होने जा रहा है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम देहरादून के पटेल नगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज मे होगा।
मेडिकल कॉलेज की तरफ से बताया गया है कि इस कार्यशाला में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए स्त्री रोग विशेषज्ञ और प्रशिक्षक चिकित्सक शामिल होंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों को आधुनिक गर्भनिरोधक विधियों, विशेषकर सबडर्मल कॉन्ट्रासेप्टिव इम्प्लांट, के बारे में उन्नत सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण करना है, ताकि राज्य में परिवार नियोजन सेवाओं को और अधिक प्रभावी व सरल बनाया जा सके।
कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों का रजिस्ट्रेशन व दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। उसके बाद स्वागत संबोधन और कार्यशाला के उद्देश्यों पर चर्चा की जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम, गर्भनिरोधक विकल्पों के विस्तार की आवश्यकता तथा इम्प्लांट से जुड़े वैश्विक व राष्ट्रीय अनुभवों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओर से विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें इम्प्लांट के उपयोग की पात्रता, क्लाइंट का मूल्यांकन, परिवार नियोजन विधियों पर परामर्श, इम्प्लांट लगाने की प्रक्रिया, इन्सर्शन के चरण, चेकलिस्ट और पोस्ट-इन्सर्शन देखभाल जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे। इसके साथ ही प्रतिभागियों को मॉडल पर इम्प्लांट लगाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया .
कार्यशाला के दौरान संभावित दुष्प्रभावों के प्रबंधन तथा क्लाइंट फॉलो-अप से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे प्रतिभागी अपने-अपने जिलों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने रविवार को बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में परिवार नियोजन सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक गर्भनिरोधक विधियों के बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करना जरूरी है, जिससे महिलाओं को सुरक्षित, प्रभावी और दीर्घकालिक गर्भनिरोधक विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से डॉक्टरों की तकनीकी दक्षता बढ़ेगी और राज्य में मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा
