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उत्तराखंड के चर्चित IAS आशीष चौहान, जिनके काम के मुरीद हुए विदेशी पर्यटक भी, अब देहरादून में दिखाएंगे अपना अनुभव

देहरादून भारत केसरी

उत्तराखंड की अफसरशाही में अगर किसी आईएएस अधिकारी का नाम जनता सबसे ज्यादा भरोसे और अपनत्व के साथ लेती है, तो उनमें एक नाम है IAS डॉ. आशीष कुमार चौहान का। राजस्थान की धरती से निकलकर देवभूमि के पहाड़ों तक पहुंचे डॉ. चौहान ने अपनी कार्यशैली से यह साबित किया कि अफसर सिर्फ दफ्तरों में बैठकर नहीं, बल्कि गांव-गांव पैदल चलकर भी जनता का दिल जीत सकते हैं।

 

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2012 बैच के उत्तराखंड कैडर के इस तेजतर्रार आईएएस अधिकारी की पहचान सिर्फ एक प्रशासनिक अफसर तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे पहाड़ के लोगों के लिए “जनता के डीएम” बन गए। दुर्गम गांवों में पैदल पहुंचना, रात के अंधेरे में “रात्रि चौपाल” लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनना और मौके पर समाधान करना उनकी खास कार्यशैली रही है।

उत्तरकाशी में डीएम रहते हुए डॉ. आशीष चौहान ने ऐसा काम किया, जिसकी गूंज सात समंदर पार तक सुनाई दी। हर्षिल घाटी के सेबों को उन्होंने नई पहचान दिलाई। “हर्षिल एप्पल” ब्रांड की दमदार मार्केटिंग और एप्पल फेस्टिवल की शुरुआत ने स्थानीय किसानों की किस्मत बदल दी। जो सेब कभी सीमित बाजार तक सिमटे थे, वे देशभर में चर्चित हो गए और किसानों की आय कई गुना बढ़ गई।

उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्पेन के एक पर्यटक एंटोनियो उनकी कार्यशैली से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने देश लौटकर एक अनाम पर्वत चोटी का नाम ही “द मजिस्ट्रेट पॉइंट वाया आशीष चौहान” रख दिया। यह किसी भारतीय प्रशासनिक अधिकारी के लिए बेहद अनोखा सम्मान माना जाता है।

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर से इतिहास में बीए, बीएड और एमए की पढ़ाई करने वाले डॉ. चौहान को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए “बेस्ट आईएएस ऑफिसर” सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

सिस्टम में रहकर जमीन से जुड़कर काम करने वाले डॉ. आशीष कुमार चौहान आज उत्तराखंड की नौकरशाही का ऐसा चेहरा बन चुके हैं, जिनकी कार्यशैली पहाड़ के लोगों के लिए उम्मीद और भरोसे की मिसाल मानी जाती है।