Uttrakhand

नंदा की चौकी पुल टेंडर पर उठे सवालों के बीच PWD का जवाब, कहा- पूरी निविदा प्रक्रिया रही पारदर्शी

देहरादून: हरबर्टपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-72 पर टौंस नदी के ऊपर बने नंदा की चौकी पुल की टेंडर प्रक्रिया को लेकर सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच लोक निर्माण विभाग (PWD) ने विस्तृत प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष रखा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुल के पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए अपनाई गई पूरी निविदा प्रक्रिया उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली-2025 के अनुरूप, पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही। विभाग के अनुसार पूरी प्रक्रिया ई-टेंडरिंग प्रणाली के माध्यम से संपन्न कराई गई और किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ।

BRIDGE APPROACH ROAD TENDER

PWD के मुताबिक देहरादून-हरबर्टपुर मोटर मार्ग पर किलोमीटर-143 स्थित टौंस नदी के ऊपर बने क्षतिग्रस्त पुराने पुल के पुनर्निर्माण के लिए पहली बार 14 नवंबर 2025 को निविदा जारी की गई थी। राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया, ताकि अधिक से अधिक निर्माण एजेंसियां इसमें भाग ले सकें। पहली निविदा में दो फर्मों ने भाग लिया।

विभाग ने बताया कि 23 दिसंबर 2025 को तकनीकी बोलियां खोली गईं और 2 जनवरी 2026 को निविदा मूल्यांकन समिति ने उनका परीक्षण किया। परीक्षण में केवल मैसर्स हिमालयन कंस्ट्रक्शन तकनीकी रूप से पात्र (Responsive) पाई गई। चूंकि वित्तीय बोली खोलने के लिए केवल एक ही पात्र बोलीदाता बचा था, इसलिए उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली-2025 के प्रावधानों के तहत पहली निविदा निरस्त कर दी गई।

इसके बाद 3 जनवरी 2026 को दोबारा ई-टेंडर जारी किया गया। दूसरी बार भी समाचार पत्रों और ई-टेंडरिंग पोर्टल के माध्यम से निविदा प्रकाशित की गई। इस बार भी दो फर्मों ने भाग लिया। 20 जनवरी 2026 को तकनीकी बोलियां खोली गईं और 21 जनवरी को उनके परीक्षण के बाद फिर केवल एक फर्म तकनीकी रूप से योग्य पाई गई। विभाग के अनुसार नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करते हुए 31 जनवरी 2026 को कार्यादेश जारी कर दिया गया।

12 जुलाई को खुला पुल, 28 जुलाई को क्षतिग्रस्त हुई एप्रोच रोड

लोक निर्माण विभाग ने बताया कि अनुबंध के बाद पुल का निर्माण कार्य पूरा किया गया और 12 जुलाई 2026 को इसे यातायात के लिए खोल दिया गया। हालांकि 28 जुलाई 2026 की सुबह करीब छह बजे पुल के दाहिनी ओर स्थित एप्रोच रोड का हिस्सा मिट्टी खिसकने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर निर्माण गुणवत्ता और टेंडर प्रक्रिया को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे।

मुख्य अभियंता कर रहे जांच

विभाग ने कहा कि एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के कारणों की प्रारंभिक जांच मुख्य अभियंता, क्षेत्रीय कार्यालय, लोक निर्माण विभाग, देहरादून द्वारा की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने जांच पूरी होने तक किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की अपील की है।

PWD का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में कोई भी पात्र फर्म भाग ले सकती है। ऐसे में किसी विशेष एजेंसी को लाभ पहुंचाने के आरोप निराधार हैं। विभाग का दावा है कि पूरी निविदा प्रक्रिया खुली, प्रतिस्पर्धात्मक और पारदर्शी रही तथा सभी इच्छुक फर्मों को समान अवसर प्रदान किया गया।