मसूरी में टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन पर आरटीआई से उठे गंभीर सवाल, क्या सिर्फ 5 से 10% पर्यटकों का ही हो रहा है पंजीकरण?
देहरादून: सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत प्राप्त आंकड़ों ने मसूरी में टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन व्यवस्था और हिल स्टेशन की कैरिंग कैपेसिटी के आकलन के लिए उपयोग किए जा रहे आंकड़ों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में वास्तविक पर्यटकों का केवल 5 से 10 प्रतिशत ही पंजीकरण हो रहा हो सकता है, जिसकी स्वतंत्र जांच और सत्यापन आवश्यक है।

आरटीआई के तहत 10 जून 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार, अगस्त 2025 से मई 2026 तक 10 महीनों में मसूरी में केवल 1,16,008 पर्यटकों का पंजीकरण दर्ज किया गया। जबकि इसी अवधि में सप्ताहांत, त्योहारों, अवकाश और ग्रीष्मकाल के दौरान मसूरी में भारी संख्या में पर्यटकों का आगमन हुआ था।
माहवार पंजीकरण के आंकड़े
आरटीआई के अनुसार पंजीकृत पर्यटकों की संख्या इस प्रकार रही—
- अगस्त 2025 – 27,349
- सितंबर – 5,876
- अक्टूबर – 8,571
- नवंबर – 6,134
- दिसंबर – 9,346
- जनवरी 2026 – 4,983
- फरवरी – 3,003
- मार्च – 4,759
- अप्रैल – 20,731
- मई – 25,256
इन 10 महीनों में कुल 1,16,008 पर्यटकों का पंजीकरण हुआ, जो वास्तविक पर्यटक संख्या की तुलना में काफी कम माना जा रहा है।
जोशीमठ संकट के बाद शुरू हुई थी व्यवस्था
जनवरी 2023 में जोशीमठ भू-धंसाव संकट के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मसूरी की वैज्ञानिक कैरिंग कैपेसिटी का आकलन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति का गठन किया, जिसे कैरिंग कैपेसिटी का अध्ययन कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई।
राज्य सरकार ने 24 जुलाई 2023 को एनजीटी के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए 18 सुधारात्मक और निवारक उपायों की पहचान की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि क्षेत्र की कैरिंग कैपेसिटी के अनुरूप पर्यटकों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
2022 और 2026 के आंकड़ों में बड़ा अंतर
उत्तराखंड सरकार की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से मई 2022 के बीच 3,78,037 पर्यटक मसूरी पहुंचे थे। वहीं आरटीआई के अनुसार जनवरी से मई 2026 के दौरान केवल 58,732 पर्यटकों का पंजीकरण हुआ।
यानी वर्ष 2026 में दर्ज पंजीकरण, वर्ष 2022 की समान अवधि में दर्ज पर्यटकों की संख्या का लगभग 15 प्रतिशत ही है। यह अंतर पंजीकरण व्यवस्था की प्रभावशीलता और क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
अनूप नौटियाल ने उठाए सवाल
अनूप नौटियाल ने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद मसूरी आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है कि वर्तमान में वास्तविक पर्यटकों में से महज 5 से 10 प्रतिशत का ही पंजीकरण हो रहा होगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अनुमान का मौजूदा पंजीकरण प्रणाली के आधार पर स्वतंत्र सत्यापन किया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पर्यटकों की वास्तविक संख्या का सटीक रिकॉर्ड ही मसूरी की वैज्ञानिक कैरिंग कैपेसिटी तय करने का आधार है। यदि विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो सड़कों, यातायात, पार्किंग, जलापूर्ति, ठोस कचरा प्रबंधन, आवास, आपातकालीन सेवाओं और मसूरी के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले दबाव का सही आकलन संभव नहीं होगा।
व्यवस्था में सुधार की मांग
अनूप नौटियाल ने कहा कि टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि प्रभावी प्रबंधन प्रणाली बनाया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने तत्काल समीक्षा, क्रियान्वयन की कमियों की पहचान, नियमों के बेहतर पालन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा तकनीक आधारित विश्वसनीय टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2022 के पर्यटक आंकड़ों और वर्तमान पंजीकरण के बीच बड़े अंतर को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को इस मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक सुधारात्मक निर्देश जारी करने चाहिए। उनका कहना है कि जब तक पंजीकरण के आंकड़े वास्तविक पर्यटक संख्या को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करेंगे, तब तक मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी का वैज्ञानिक आकलन और पर्यटन का प्रभावी प्रबंधन संभव नहीं हो सकेगा।

