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कांग्रेस में शामिल हुए डीके पाल समेत कई लोग, हरक सिंह रावत ने सुनाया संघर्ष का भावुक किस्सा

देहरादून। देहरादून प्रेस क्लब में रविवार को आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता डीके पाल समेत कई लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। ठेली एवं ऑटो यूनियन तथा विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े लोगों ने भी कांग्रेस का दामन थामा। पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने सभी नए सदस्यों को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई।

सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम के दौरान हरक सिंह रावत ने अपने छात्र जीवन की पुरानी यादें साझा करते हुए माता-पिता के महत्व और जीवन में संघर्ष की भूमिका पर भावुक अंदाज में बात रखी।

CONGRESS LEADER HARAK SINGH RAWAT

 

ट्रेन देखने के लिए श्रीनगर से कोटद्वार भाग गए थे हरक

हरक सिंह रावत ने बताया कि इंटर की पढ़ाई के दौरान उन्होंने कभी ट्रेन नहीं देखी थी। उस समय श्रीनगर में रेलवे लाइन नहीं थी। वह श्रीनगर राजकीय इंटर कॉलेज के छात्रावास में रहते थे।

उन्होंने बताया कि ट्रेन देखने की इच्छा इतनी प्रबल थी कि एक दिन वह घरवालों को बिना बताए कोटद्वार चले गए। कोटद्वार में उनके गांव का एक परिचित व्यक्ति एक दुकान पर काम करता था। वहीं उन्होंने पहली बार अपनी आंखों से ट्रेन देखी। इसी दौरान उन्होंने पहली बार ब्लैक एंड व्हाइट टेलीविजन भी देखा।

ट्रेन में बैठ गए, लेकिन पता नहीं था कहां जाएगी

हरक सिंह रावत के मुताबिक इसके बाद वह कोटद्वार से ट्रेन में बैठ गए। उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि ट्रेन किस दिशा में जा रही है। आखिरकार वह लक्सर जंक्शन पहुंच गए।

उस समय उनके पास एक भी पैसा नहीं था। स्टेशन के पास एक मिठाई की दुकान थी, जिसके मालिक का साइकिल स्टैंड भी था। उन्होंने करीब एक सप्ताह तक वहां काम किया।

एक दिन मिठाई की दुकान का कर्मचारी काम पर नहीं आया तो दुकान मालिक ने उन्हें चाय के बर्तन साफ करने के लिए कहा। काम के दौरान मालिक की डांट सुनकर वह भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े।

बस कंडक्टर ने की मदद, हरिद्वार में बेची चाट

उन्होंने बताया कि दुकान पर बैठे एक रोडवेज बस कंडक्टर को उनकी स्थिति पर दया आ गई। कंडक्टर उन्हें बस में बैठाकर हरिद्वार ले आया।

हरिद्वार में उन्होंने करीब तीन दिन चाट बेचकर अपना गुजारा किया। आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें अपने फौजी पिता से उपहार में मिली घड़ी को एक चाट विक्रेता के पास 20 रुपये में गिरवी रखना पड़ा।

इसके बाद वह घड़ी गिरवी रखकर हरिद्वार से वापस श्रीनगर चले गए।

पिता ने थाने पहुंचकर वापस दिलाई घड़ी

हरक सिंह रावत ने बताया कि घर लौटने के बाद परिवार ने उनके पिता को पत्र लिखकर उनकी सकुशल वापसी की जानकारी दी। पत्र मिलने के बाद उनके पिता छुट्टी लेकर घर आए।

जब हरक ने अपने पिता को हरिद्वार में घड़ी गिरवी रखने की बात बताई तो उनके पिता स्वयं हरिद्वार पहुंचे और दुकानदार से घड़ी वापस मांगी। दुकानदार ने घड़ी लौटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उनके पिता ने संबंधित थाने में शिकायत की। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद दुकानदार ने 20 रुपये लेकर घड़ी उनके पिता को वापस सौंप दी।

‘माता-पिता का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता’

अपने जीवन के इस भावुक प्रसंग को साझा करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में संघर्ष के बुरे दौर भी देखे हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि माता-पिता केवल हमें जन्म ही नहीं देते, बल्कि हमारे निर्माण, पालन-पोषण और संस्कारों की नींव भी रखते हैं। उनके संघर्ष और त्याग को जीवन में कभी भुलाया नहीं जा सकता।

सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नए सदस्यों का स्वागत किया और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया।