चार धाम यात्रा 2025: एसडीसी फाउंडेशन की रिपोर्ट में सुरक्षा, भीड़ और प्रबंधन पर गंभीर सवाल
देहरादून:
एसडीसी फाउंडेशन ने चार धाम यात्रा 2025 पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट “पाथवेज टू पिलग्रीमेज: डेटा इनसाइट्स, चैलेंजेस एंड ऑपर्च्युनिटीज” जारी की। देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में संस्थापक अनूप नौटियाल ने रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष साझा किए।

रिपोर्ट की मुख्य बातें
रिपोर्ट में 210 दिनों और 30 सप्ताह के विस्तृत डेटा का विश्लेषण 14 ग्राफ के माध्यम से किया गया है। इसमें दैनिक, साप्ताहिक और मासिक आधार पर यात्रा के रुझानों को समझाया गया है।
वर्ष 2025 में चार धाम यात्रा पर कुल 51,06,346 श्रद्धालु पहुंचे, जो 2024 की तुलना में 6.4% अधिक है, लेकिन 2023 के 56,16,653 श्रद्धालुओं के आंकड़े से कम है।
यात्रा में भीड़ का असमान वितरण


रिपोर्ट के अनुसार,
210 दिनों के डेटा विश्लेषण में सामने आए भीड़, जोखिम और प्रबंधन की चुनौतियां; सरकार से डेटा-आधारित नीति अपनाने की अपील
72% श्रद्धालु पहले 60 दिनों में ही यात्रा पर पहुंचे
34% पहले 30 दिनों में
38% अगले 30 दिनों (31–60 दिन) में
इसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से घटती गई, जबकि मानसून के दौरान यात्रा पर बड़ा असर देखने को मिला।
मई-जून में कुल 72% श्रद्धालु पहुंचे, जबकि जुलाई से सितंबर के बीच केवल 17% ही आए।
सबसे व्यस्त सप्ताह
4 से 10 जून के बीच का सप्ताह सबसे ज्यादा व्यस्त रहा, जिसमें 5,47,084 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यह कुल यात्रा का लगभग 11% था।
फुटफॉल और ‘शून्य-श्रद्धालु’ दिन
रिपोर्ट में सामने आया कि:
कुल 86 दिन ऐसे रहे जब किसी भी धाम में श्रद्धालु नहीं पहुंचे
67 दिन 1–500 श्रद्धालु
80 दिन 501–1000 श्रद्धालु
यमुनोत्री (38 दिन) और गंगोत्री (35 दिन) में सबसे ज्यादा शून्य-श्रद्धालु दिन दर्ज किए गए।
मुख्य चुनौतियां
रिपोर्ट में चार धाम यात्रा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों को चिन्हित किया गया है:
पीक सीजन में अत्यधिक भीड़
कमजोर बुनियादी ढांचा
पर्यावरणीय क्षरण
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षा जोखिम
विशेष रूप से, 2025 में लगभग 6 सप्ताह के भीतर 5 हेलीकॉप्टर घटनाएं सामने आईं, जिनमें 2 हादसों में 13 लोगों की मौत हुई। गौरीकुंड के पास हुई दुर्घटना ने हवाई सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।
आर्थिक और स्थानीय प्रभाव
खराब मौसम, भूस्खलन और अव्यवस्थित ढांचे के कारण कई दिनों तक कम या शून्य यात्रा रही, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा।
रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें
एसडीसी फाउंडेशन ने 10 अहम सुझाव दिए हैं:
रिकॉर्ड संख्या के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता
वहन क्षमता आधारित यात्रा प्रबंधन
मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली
हेलीकॉप्टर संचालन में सख्त सुरक्षा मानक
स्वास्थ्य और मेडिकल तैयारी को मजबूत करना
पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन
डेटा-आधारित और तकनीक-सक्षम सिस्टम लागू करना
विशेषज्ञों की राय
रिपोर्ट में हेलीकॉप्टर पायलट कैप्टन डी.के. यादव और पूर्व बद्रीनाथ-केदारनाथ समिति सदस्य भास्कर डिमरी के विचार भी शामिल हैं। दोनों ने सुरक्षा, समन्वय और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
सरकार को संदेश
अनूप नौटियाल ने कहा कि सरकार को रिकॉर्ड संख्या के उत्सव से आगे बढ़कर सुरक्षित, सतत और डेटा-आधारित यात्रा प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि रिपोर्ट को पर्यटन मंत्री, मुख्य सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों को सौंपा जाएगा।
