दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: विकास और पर्यावरण संतुलन का नया मॉडल
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: विकास और पर्यावरण संतुलन का मॉडल ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को करेंगे उद्घाटन, वन मंत्री ने गिनाए परियोजना के बड़े फायदे।
देहरादून, 13 अप्रैल 2026 — भारत केसरी
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रस्तावित उद्घाटन से पहले आज एक महत्वपूर्ण मीडिया ब्रीफिंग आयोजित की गई। इस कॉरिडोर का उद्घाटन 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा किया जाएगा।

मीडिया को संबोधित करते हुए उत्तराखण्ड सरकार के वन मंत्री ने बताया कि यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक बेहतरीन उदाहरण है।
उन्होंने जानकारी दी कि इस परियोजना का अंतिम 20 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन क्षेत्र और उत्तराखण्ड के Rajaji Tiger Reserve सहित घने जंगलों से होकर गुजरता है।
परियोजना के तहत वन भूमि के बदले 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है, जिसमें लगभग 1.95 लाख पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देशन में 40 करोड़ रुपये की लागत से इको-रेस्टोरेशन के कार्य भी किए जा रहे हैं।
वन मंत्री ने बताया कि इस हाईवे प्रोजेक्ट में एशिया का सबसे लंबा लगभग 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है। इसमें हाथियों के लिए अंडरपास और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन हेतु विशेष संरचनाएं विकसित की गई हैं।
वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए साउंड बैरियर और लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं, जिससे शोर और प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव न्यूनतम रहे।
उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी और विभिन्न प्रजातियों के बीच बेहतर जीन आदान-प्रदान संभव होगा, जो जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
परियोजना से अगले 20 वर्षों में 2.44 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जो लगभग 60 से 65 लाख पेड़ों द्वारा किए जाने वाले अवशोषण के बराबर है। साथ ही करीब 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी।
वन मंत्री ने यह भी कहा कि यह कॉरिडोर यात्रा को तेज और सुगम बनाएगा, जिससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
अंत में उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा, जो भविष्य की परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक साबित होगा।
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