खान सर VS अंजना ओम कश्यप: बच्चों के स्कूल तक पहुंचा विवाद, हाईकोर्ट ने लिया बड़ा फैसला
नई दिल्ली: ऑनलाइन शिक्षकों पर की गई टिप्पणी को लेकर पत्रकार अंजना ओम कश्यप और शिक्षाविद फैसल खान (खान सर) के बीच चल रहे मानहानि विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह देते हुए मामले को मध्यस्थता (मेडिएशन) के लिए भेज दिया है।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि नुकसान पहले ही हो चुका है और अब दोनों पक्ष स्थिति को केवल बेहतर ढंग से संभाल सकते हैं। अदालत ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव को मध्यस्थ नियुक्त किया।
अंजना की ओर से क्या कहा गया?
सुनवाई के दौरान अंजना ओम कश्यप की ओर से पेश अधिवक्ता ऋषिकेश बरुआ ने अदालत से विवादित सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि खान सर से जुड़े पोस्ट पूरी तरह मानहानिपूर्ण हैं।
बरुआ ने यह भी आरोप लगाया कि खान सर ने अंजना ओम कश्यप के बच्चों के स्कूल की जानकारी सार्वजनिक कर दी, जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। उन्होंने अदालत से कहा कि बच्चों और उनके स्कूल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए थी।
कोर्ट ने दी संयम बरतने की सलाह
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी की आलोचना करना गलत नहीं है, लेकिन आलोचना की भाषा और स्तर सभ्य होना चाहिए।
कोर्ट ने खान सर से यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में बच्चों से जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजनिक न की जाए। इस पर खान सर की ओर से अदालत को बताया गया कि बच्चों से संबंधित जानकारी हटाई जाएगी। साथ ही उनकी ओर से यह भी कहा गया कि वादी पक्ष भी इस विवाद पर सार्वजनिक टिप्पणियां करना बंद करे।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद नीट परीक्षा प्रणाली पर आयोजित एक लाइव बहस के दौरान शुरू हुआ था। बहस में अंजना ओम कश्यप ने कुछ ऑनलाइन शिक्षकों की आलोचना करते हुए उन्हें कथित तौर पर “धोखेबाज” और “व्यूज के पीछे भागने वाला” बताया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई पोस्ट और प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिसके बाद उन्होंने मानहानि का मुकदमा दायर किया।
अब दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना तलाशने के लिए मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है।


