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बोर्ड ऑफ ट्रेड बैठक में गूंजी उत्तराखंड की आवाज, मंत्री भरत सिंह चौधरी ने हिमालयी राज्यों के लिए फ्रेट सब्सिडी की उठाई मांग

नई दिल्ली/देहरादून:

उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयोजित बोर्ड ऑफ ट्रेड (Board of Trade) की उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के निर्यात हितों की प्रभावी पैरवी की। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वर्ष 2030-31 तक भारत के 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की रणनीति पर चर्चा हुई।

बैठक में विभिन्न राज्यों के मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रतिनिधि और गैर-आधिकारिक सदस्य शामिल हुए। इस दौरान भरत सिंह चौधरी ने उत्तराखंड की औद्योगिक प्रगति, निर्यात क्षमता और पर्वतीय राज्यों की विशेष चुनौतियों को प्रमुखता से रखा।

हरिद्वार में नया ICD, किच्छा में बनेगी इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी

मंत्री ने बताया कि राज्य में पंतनगर और काशीपुर में इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) पहले से संचालित हैं, जबकि हरिद्वार में बीएचईएल के सहयोग से नए ICD की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। वहीं उधम सिंह नगर के किच्छा में करीब 800 एकड़ भूमि पर इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी विकसित की जा रही है, जिससे राज्य के औद्योगिक और निर्यात क्षेत्र को नई गति मिलेगी।

मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी से निवेश को बढ़ावा

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाले विनिर्माण उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही उद्योगों और निर्यातकों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत किया गया है, जिसके चलते उत्तराखंड लगातार राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

GI और ODOP उत्पादों पर खास फोकस

भरत सिंह चौधरी ने बताया कि उत्तराखंड के 10 ओडीओपी (One District One Product) उत्पादों समेत करीब 20 उत्पादों को GI टैग मिल चुका है। इन उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल ‘हाउस ऑफ हिमालया’ ब्रांड के जरिए उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है।

हिमालयी राज्यों के लिए फ्रेट सब्सिडी की मांग

बैठक में मंत्री ने हिमालयी राज्यों के निर्यातकों के लिए फ्रेट सब्सिडी लागू करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि पर्वतीय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण परिवहन लागत अधिक होती है, जिससे निर्यात प्रभावित होता है। इसके अलावा उन्होंने देशभर के GI टैग उत्पादों के लिए केंद्रीकृत ब्रांडिंग और मार्केटिंग योजना शुरू करने का भी सुझाव दिया, ताकि छोटे उत्पादकों, शिल्पकारों और उद्यमियों को बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर मिल सकें।

2030 तक निर्यात लक्ष्य हासिल करने का भरोसा

भरत सिंह चौधरी ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों से भारत वर्ष 2030-31 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करेगा और उत्तराखंड भी इस राष्ट्रीय अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।