उत्तराखंड STF का ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट’: 15 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 247 संदिग्धों को नोटिस
820 संदिग्ध बैंक खातों की जांच, 644 सिम और 630 IMEI कराए गए बंद; हरिद्वार में ‘नवादा ग्रुप’ का पर्दाफाश
देहरादून: साइबर अपराधियों और उनके पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने सात दिवसीय ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट’ चलाया। अभियान का फोकस सिर्फ ठगी करने वालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साइबर ठगी की रकम निकालने, बैंक खाते उपलब्ध कराने, सिम, एटीएम, चेक और अन्य डिजिटल संसाधन मुहैया कराने वाले नेटवर्क पर भी कार्रवाई की गई।
पुलिस के मुताबिक, 24 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चले अभियान में 15 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 247 संदिग्धों को कानूनी नोटिस जारी किए गए।
820 संदिग्ध बैंक खातों की जांच
अभियान के दौरान साइबर अपराध से जुड़े 820 संदिग्ध बैंक खातों की जांच की गई। इनके आधार पर 159 एफआईआर दर्ज की गईं। इसके अलावा 1,236 एटीएम से रकम निकासी वाले स्थानों की जांच कर 32 एफआईआर दर्ज की गईं।
वहीं, 84 चेक से रकम निकासी वाले स्थानों की जांच के बाद 37 एफआईआर दर्ज हुईं। साइबर अपराध में इस्तेमाल पाए गए 644 संदिग्ध सिम और 630 IMEI बंद कराए गए। पुलिस ने 442 संदिग्ध मामलों की भी जांच की।
इसके अलावा 22 संदिग्ध सिम-पॉस (Point of Sale) की जांच की गई, जिनके आधार पर 10 एफआईआर दर्ज की गईं।
एक महीने की तकनीकी निगरानी के बाद चिन्हित किए हॉटस्पॉट
STF के अनुसार, ऑपरेशन शुरू करने से पहले एक महीने तक डिजिटल, दूरसंचार और वित्तीय संकेतकों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। 1 से 31 जुलाई 2026 के साइबर सुरक्षा अभियान के दौरान मोबाइल नंबर, सिम/IMEI, साइबर ठगी की रकम वाले बैंक खातों, एटीएम और चेक से निकासी वाले स्थानों तथा संदिग्ध सिम-पॉस से जुड़ी जानकारी जुटाई गई।
अलग-अलग स्रोतों से मिली सूचनाओं को आपस में मिलाकर कार्रवाई योग्य डेटा तैयार किया गया। इसके बाद चिन्हित स्थानों पर पहुंचकर जांच और कानूनी कार्रवाई की गई।
पुलिस ने साइबर अपराध के हॉटस्पॉट चिन्हित करने के लिए I4C के प्रतिबिंब नक्शे का भी इस्तेमाल किया। इसके जरिए डिजिटल, दूरसंचार, वित्तीय और भौगोलिक सूचनाओं का विश्लेषण कर संदिग्ध स्थानों, सिम-IMEI, सिम-पॉस, बैंक खातों तथा एटीएम और चेक से रकम निकासी वाले स्थानों की पहचान की गई।
हरिद्वार में ‘नवादा ग्रुप’ का खुलासा
ऑपरेशन हॉटस्पॉट के दौरान हरिद्वार के थाना श्यामपुर पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर संगठित गिरोह ‘नवादा ग्रुप’ का खुलासा किया। पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
तकनीकी जांच में इस नेटवर्क से जुड़े 200 से अधिक बैंक खाते सामने आए, जिनमें साइबर ठगी की रकम के सीधे लेनदेन के साक्ष्य मिले। आरोपियों के कब्जे से 45 से अधिक एटीएम कार्ड, 20 बैंक पासबुक, दो लैपटॉप और 17 मोबाइल फोन बरामद किए गए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लोन, ऑनलाइन कारोबार और पैसा दोगुना करने का लालच देकर की गई ठगी की रकम ऐसे बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी, जिनका इस्तेमाल रकम को आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। इसके बाद एटीएम से नकदी निकालने और सीडीएम के माध्यम से दूसरे खातों में रकम जमा या ट्रांसफर कर लेनदेन का रास्ता छिपाने का प्रयास किया जाता था।
240 साइबर अपराधियों और संदिग्धों की पहचान
उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष 2026 में 240 साइबर अपराधियों और संदिग्धों का विवरण I4C के समन्वय पोर्टल पर दर्ज किया है। दूसरे राज्यों में दर्ज साइबर अपराध के मामलों से इनके मिलान के दौरान 100 से अधिक अंतरराज्यीय कड़ियां सामने आईं।
इन कड़ियों के आधार पर संबंधित राज्यों की पुलिस से समन्वय कर संदिग्धों की जांच, आपराधिक इतिहास का सत्यापन और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।
साइबर मामलों में अंतरराज्यीय समन्वय के लिए CIAR के माध्यम से BNSS की धारा 35(3) के तहत 303 नोटिस दूसरे राज्यों को भेजे गए। वहीं, दूसरे राज्यों के साइबर अपराध मामलों में उत्तराखंड से जुड़े आरोपियों और संदिग्धों के संबंध में प्राप्त 247 नोटिस की तामील उत्तराखंड पुलिस ने कराई।
1930/NCRP से 23.44 करोड़ की ठगी की रकम रोकी
ऑपरेशन हॉटस्पॉट के अलावा वर्ष 2026 में 1930/NCRP पर प्राप्त 18,749 साइबर अपराध शिकायतों पर कार्रवाई की गई। पुलिस, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के समन्वय से करीब 23.44 करोड़ रुपये की ठगी की रकम समय रहते रोकने में सफलता मिलने का दावा किया गया है।
इसी अवधि में प्राप्त 683 ई-जीरो एफआईआर में से 659 को नियमित एफआईआर में बदला या जोड़ा गया।
1.75 लाख विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की जानकारी
कार्रवाई के साथ पुलिस ने साइबर अपराध से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया। 27 अगस्त को आयोजित राज्यव्यापी ऑनलाइन साइबर जागरूकता कार्यक्रम में करीब 1,100 राजकीय विद्यालयों के 1.75 लाख छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों को AI, डीपफेक, साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन यौन शोषण, ऑनलाइन गेमिंग, डिजिटल गिरफ्तारी, निवेश के नाम पर होने वाली ठगी, सोशल मीडिया सुरक्षा और 1930/NCRP के संबंध में जानकारी दी गई।
चार जिलों में करीब 2,000 पुलिसकर्मियों की विशेष कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर को देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल के चिन्हित साइबर अपराध क्षेत्रों में भी विशेष अभियान चलाया गया। STF की तकनीकी टीम के साथ संबंधित जिलों के करीब 2,000 पुलिसकर्मी मैदान में उतरे।
इस दौरान 300 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल और सिम की जांच के साथ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नोटिस, एफआईआर और गिरफ्तारी की कानूनी कार्रवाई जारी है।
साइबर नेटवर्क के मददगारों पर भी जारी रहेगा शिकंजा
उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन हॉटस्पॉट के बाद भी साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। I4C के प्रतिबिंब, NCRP और अन्य तकनीकी माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं का लगातार विश्लेषण कर साइबर अपराध वाले क्षेत्रों, ठगी की रकम वाले बैंक खातों, संदिग्ध खातों, सिम-पॉस और अन्य डिजिटल एवं वित्तीय संसाधनों की पहचान की जाएगी।
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी के मुख्य आरोपियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों और मददगारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
