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सोशल मीडिया पर 80s AI Trend बना साइबर एक्सपर्ट्स के लिए चिंता का विषय!

एक तस्वीर के चक्कर में कहीं अपनी पहचान का डेटा तो नहीं दे रहे आप ?

 

भारत केसरी

इन दिनों सोशल मीडिया पर  80s AI Trend तेजी से वायरल हो रहा है। लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को AI की मदद से 1980 के दशक के रेट्रो और विंटेज लुक में बदलकर सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कर रहे हैं। तस्वीर देखने में भले ही शानदार लगे, लेकिन साइबर सुरक्षा के लिहाज से इसके पीछे छिपे खतरे को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

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साइबर एक्सपर्ट्स की सबसे बड़ी चिंता है—आपका चेहरा और आपकी निजी तस्वीरें। जब आप किसी AI प्लेटफॉर्म या अनजान ऐप पर अपनी हाई-क्वालिटी फोटो अपलोड करते हैं, तो वह फोटो उस सेवा के सर्वर तक पहुंच सकती है। प्लेटफॉर्म की प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार फोटो को कैसे स्टोर, प्रोसेस या इस्तेमाल किया जाता है, यह समझना बेहद जरूरी है।

आज आपने सिर्फ 80s लुक बनाने के लिए फोटो अपलोड की, लेकिन भविष्य में यही तस्वीर किसी फर्जी प्रोफाइल, डीपफेक या पहचान के गलत इस्तेमाल में दिखाई दे तो ?

 

हैकर्स भी ट्रेंड का उठा सकते हैं फायदा। वायरल AI ट्रेंड के नाम पर नकली ऐप, फर्जी वेबसाइट और संदिग्ध लिंक लोगों तक पहुंचाए जा सकते हैं। एक गलत क्लिक आपको फोटो से कहीं आगे—मोबाइल की निजी जानकारी, सोशल मीडिया अकाउंट या अन्य संवेदनशील डेटा के जोखिम तक पहुंचा सकता है।

 

🛑सबसे बड़ा खतरा: डीपफेक !

AI तकनीक लगातार शक्तिशाली हो रही है। आपकी सार्वजनिक तस्वीरों का गलत इस्तेमाल कर कोई व्यक्ति फर्जी फोटो, वीडियो या सोशल मीडिया प्रोफाइल तैयार करने की कोशिश कर सकता है।

🔴 साइबर सुरक्षा का सीधा संदेश—हर वायरल ट्रेंड में आंख बंद करके शामिल न हों।

✅ अनजान AI ऐप पर फोटो अपलोड करने से बचें।

✅ ऐप की Privacy Policy और Permissions जरूर जांचें।

✅ संदिग्ध लिंक या APK डाउनलोड न करें।

✅ AI फोटो बनाने के नाम पर मांगी जा रही अनावश्यक जानकारी न दें।

✅ अपनी बेहद निजी या संवेदनशील तस्वीरें किसी अनजान प्लेटफॉर्म पर अपलोड न करें।

✅ किसी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत अपने अकाउंट सुरक्षित करें और संबंधित साइबर हेल्पलाइन/पोर्टल की मदद लें।