नवीकरणीय ऊर्जा में उत्तराखंड का राष्ट्रीय डंका, विशेष श्रेणी के राज्यों में हासिल किया दूसरा स्थान
MNRE के RE-SAF फ्रेमवर्क में उत्तराखंड को बड़ी कामयाबी | 5 नवंबर को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन करेंगे सम्मानित, मुख्यमंत्री धामी ने बताया प्रदेश की प्रतिबद्धता का प्रमाण
देहरादून। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के रिन्यूएबल एनर्जी स्टेट असेसमेंट फ्रेमवर्क (RE-SAF) के तहत उत्तराखंड को देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विशेष श्रेणी के राज्यों में दूसरा स्थान मिला है। इस उपलब्धि के साथ ही उत्तराखंड ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी नीतिगत प्रतिबद्धता और विकास प्रयासों का लोहा मनवाया है।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष सारंगी ने 31 अक्टूबर 2026 को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को पत्र भेजकर राज्य की इस उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी दी। मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार को बधाई देते हुए कहा कि राज्य ने नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के साथ ही इस क्षेत्र में लगातार प्रभावी प्रयास किए हैं।
5 नवंबर को उपराष्ट्रपति करेंगे सम्मानित
उत्तराखंड को इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए 5 नवंबर 2026 को आयोजित भारत RE समिट एवं एक्सपो-2026 के समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन राज्य को यह सम्मान प्रदान करेंगे।

धामी बोले- स्वच्छ ऊर्जा के संकल्प को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मिला यह सम्मान प्रदेश की प्रतिबद्धता, निरंतर प्रयासों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में भारत स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता हासिल करने का राष्ट्रीय लक्ष्य देश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई दिशा दे रहा है। उत्तराखंड भी इस लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देवभूमि उत्तराखंड में सौर ऊर्जा, जल विद्युत, लघु जल विद्युत और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देना है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मिला यह सम्मान भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार और नवाचार को नई गति देने के लिए प्रेरित करेगा।
इन मानकों पर हुआ राज्यों का मूल्यांकन
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से तैयार RE-SAF फ्रेमवर्क के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन नवीकरणीय ऊर्जा विकास से जुड़े विभिन्न मानकों पर किया जाता है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि, नीतिगत एवं नियामकीय व्यवस्था, ग्रिड से संबंधित सुविधाएं, बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का प्रदर्शन और निवेश के अनुकूल वातावरण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।
इस मूल्यांकन का उद्देश्य राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, बेहतर कार्यप्रणालियों को प्रोत्साहित करना और स्वच्छ ऊर्जा के विकास को गति देना है। उत्तराखंड का दूसरे स्थान पर पहुंचना राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।

