आईपीआरएस ने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइज़ेशन के साथ एक ऐतिहासिक बौद्धिक संपदा संवाद के लिए वैश्विक और भारतीय रचनाकारों को एक मंच पर लाया
भारत के एंटरटेनमेंट और क्रिएटिव इंडस्ट्री के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में, इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी लिमिटेड (IPRS) ने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइज़ेशन की डिप्टी डायरेक्टर जनरल, सिल्वी फॉर्बिन के पहले आधिकारिक भारत दौरे के अवसर पर मुंबई में एक विशेष बंद-द्वार राउंडटेबल चर्चा का आयोजन किया।
इस उच्च-स्तरीय चर्चा में भारत के संगीत और मनोरंजन उद्योग के प्रमुख रचनाकारों, गीतकारों, संगीतकारों, पटकथा लेखकों, म्यूज़िक लेबल्स, प्रकाशकों, कानूनी विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। इस चर्चा का उद्देश्य रचनात्मकता की रक्षा, नवाचार को प्रोत्साहित करने और एआई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के युग में भविष्य की रूपरेखा तैयार करने में बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की भूमिका पर विचार-विमर्श करना था।
इस सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध गीतकार, कवि, लेखक और IPRS के चेयरमैन श्री जावेद अख्तर ने की। यह सत्र वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर बौद्धिक संपदा अधिकारों की प्रासंगिकता पर चर्चा के लिए एक रणनीतिक मंच सिद्ध हुआ और इसने न केवल अधिकारों की सुरक्षा बल्कि एक टिकाऊ रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मजबूत IP सिस्टम की आवश्यकता को रेखांकित किया।
“संगीत उद्योग हमेशा तकनीकी प्रगति की अग्रिम पंक्ति में रहा है। इस उद्योग ने समय-समय पर आई तकनीकी चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया है और रचनात्मक समुदाय के बीच मजबूत एकता दिखाई है। भारत में AI क्रांति को लेकर जागरूकता और तैयारी देखकर मैं बेहद प्रभावित हूं। भारतीय रचनाकारों के साथ मिलकर हम इस नए युग के लिए आवश्यक नीतिगत, व्यावसायिक और तकनीकी समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं। भारतीय संगीत की दीर्घायु की कामना करती हूं!” – सिल्वी फॉर्बिन, डिप्टी डायरेक्टर जनरल, वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइज़ेशन

