अपने चाहतों को कुर्सी पर बैठाने के लिए ईमानदार अधिकारियों को VRS लेने पर मजबूर कर रही सरकार
उत्तराखंड में एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि ईमानदार अधिकारी अपने पद पर क्यों नहीं टिक पा रहे हैं? वन विभाग के प्रमुख एवं वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी डॉ. धनंजय मोहन ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। एक ऐसा अधिकारी जिसने हमेशा ईमानदारी को अपनी प्राथमिकता में रखा, जिसे उसके सिद्धांतों और स्पष्टवादिता के लिए जाना जाता था आज वही सिस्टम के भीतर घुटन से हार गया।
डॉ. धनंजय मोहन की छवि एक निर्भीक, निडर और निहायत ईमानदार अफसर के तौर पर रही है। उन्होंने हमेशा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा लिया, गलत का विरोध किया और सत्य के पक्ष में खड़े रहे। लेकिन सिस्टम उन्हें बर्दाश्त नहीं कर सका—इतना कि रिटायरमेंट में मात्र दो माह शेष होने के बावजूद उनका वीआरएस आवेदन चंद घंटों में ही मंजूर कर लिया गया।
जिन प्रक्रियाओं में सामान्यतः हफ्तों लग जाते हैं, वे महज कुछ घंटों में पूरी हो गईं—वन मंत्री की स्वीकृति, सचिव की सहमति, मुख्य सचिव की मंजूरी और फिर मुख्यमंत्री की स्वीकृति। और यही नहीं, डॉ. मोहन की जगह उनके बाद वरिष्ठतम आईएफएस समीर सिन्हा की तत्काल तैनाती भी कर दी गई। सवाल उठता है—आख़िर इतनी जल्दी क्यों? क्या प्रशासनिक कामकाज ठप पड़ गया था या फिर किसी खास एजेंडे के तहत यह निर्णय लिया गया? एक और बात डॉ धनंजय मोहन ने छुट्टी के लिए भी आवेदन किया था। लेकिन, छुट्टी पर जाने से पहले ही उन्होंने वीआरएस ले लिया। इस दौरान ऐसा क्या हो गया।
इस प्रकार से आईएएस अधिकारी के वालंटियर रिटायरमेंट पर राजनीति भी होनी लाजिमी थी और कांग्रेस प्रदेश कमेटी प्रदेश अध्यक्ष
करन माहरा का आरोप- अपने चाहतों को कुर्सी पर बैठाने के लिए ईमानदार अधिकारियों को VRS लेने पर मजबूर कर रही सरकार
IPS रचिता जुयाल के नौकरी से इस्तीफे के बाद अब IFS अफसर धनंजय मोहन के वीआरएस लेने के बाद से शासन प्रशासन में तो हलचल मची ही है लेकिन राजनीति भी गरमा गई है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने सीधे तौर पर सरकार पर आरोप लगाया है कि अपने चहेतों को कुर्सी पर बैठाने के लिए सरकार ईमानदार अधिकारियों को वीआरएस लेने पर मजबूर कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष करन महारा ने कहा कि चंद घंटे में ही धनंजय सिंह के वीआरएस की अर्जी को स्वीकार करना भी कई सवाल खड़े कर रहा है।
हालांकि आईएफएस अफसर ने अपने वीआरएस लेने की पीछे की वजह पारिवारिक कारण बताया है लेकिन कांग्रेस अब सरकार पर हमलावर है क्योंकि पहले रचिता जुयाल और अब धनंजय सिंह।
बताते चले कि धनंजय मोहन 1988 बैच के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी हैं और वे अपने सेवा कार्यकाल के अंतिम चरण में थे। लेकिन उन्होंने तय समय से पहले वीआरएस लेकर सबको चौंका दिया। उनके कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें वन संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने को लेकर प्रयास शामिल रहे।

