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अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ती उत्तराखंड भाजपा: उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस

देहरादून। भाजपा में लोकतंत्र की अंतिम सांसें चल रही हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार महेंद्र भट्ट को पुनः उत्तराखंड भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आज प्रदेश भाजपा मुख्यालय में नामांकन प्रक्रिया के दौरान सिर्फ महेंद्र भट्ट द्वारा नामांकन किया गया, जिसमें स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति ने स्पष्ट संकेत दे दिया कि भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र अब केवल दिखावा बनकर रह गया है।

 

कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्थिति अघोषित आपातकाल जैसी है, जहाँ अन्य दावेदार नेताओं को बिलों में छिपा रहने का अप्रत्यक्ष आदेश दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि क्या भट्ट के सिवा भाजपा में कोई योग्य और अनुभवी नेता है ही नहीं। हल्द्वानी के महापौर गजराज बिष्ट, विधायक खजानदास, महामंत्री आदित्य कोठारी, उपाध्यक्ष ज्योति गैरोला आदि के नामों की चर्चा थी, लेकिन मुख्यमंत्री की उपस्थिति के बाद सबकुछ औपचारिकता मात्र रह गया।

दसौनी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा ने खुद “एक पद, एक व्यक्ति” का सिद्धांत दिया था, लेकिन अब उसी को खुलेआम तोड़ा जा रहा है। इससे पूर्व भी 2012 से 2017 के बीच अजय भट्ट नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की दोहरी भूमिका निभा चुके हैं। क्या यह भाजपा में प्रतिभा और योग्य नेताओं की कमी को उजागर नहीं करता ?

 

महेंद्र भट्ट के कार्यकाल को विफल और विवादित करार देते हुए गरिमा दसौनी ने कहा कि उनके कार्यकाल में संगठन पूरी तरह दिशाहीन रहा, कार्यकर्ताओं में अनुशासनहीनता चरम पर रही, चाहे मंडल अध्यक्षों का नाबालिगों के साथ दुष्कर्म मामला हो,मंत्री रहते हुए प्रेम चंद अग्रवाल का पहाड़ वासियों को गाली का प्रकरण हो, भर्ती घोटाले हो,प्रणव सिंह की बदजुबानी और हत्यारबाजी हो,हरिद्वार की महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष की काली करतूतें हों प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर महेंद्र भट्ट पूर्ण रूप से कार्यकर्ताओं और नेताओं पर नकेल कसने में असफल साबित हुए और वे केवल मुख्यमंत्री के नाम का ढोल पीटने तक सीमित रहे। ऐसे व्यक्ति को दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने की तैयारी यह दर्शाती है कि भाजपा में काबिलियत नहीं, बल्कि चाटुकारिता और कट्टरपंथी बयानबाजी ही पद दिलाने का पैमाना बन चुकी है।

 

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह लोकतंत्र के साथ अन्याय है और भाजपा के भीतर पनप रहा तानाशाही प्रवृत्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण भी। कांग्रेस पार्टी इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ मानती है और प्रदेश की जनता को इस राजनीतिक नौटंकी से आगाह करती है।

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