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मुंह मे सोने का चम्मच लेकर पैदा युवराज नही हो सकते किसानी का आदर्श : उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष

मुंह मे सोने का चम्मच लेकर पैदा युवराज नही हो सकते किसानी का आदर्श: भट्ट

हरदा जानते हैं अपने युवराज की हकीकत, महिमामंडन हास्यास्पद

खेती किसानी मे राहुल को फॉलो करने का सुझाव चाटुकारिता और आत्ममुग्धता के खोल मे बन्द करने जैसा : भट्ट

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देहरादून। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी सौभाग्य से मुंह मे सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं और उन्हे न गरीबी न ही खेती किसानी की कोई समझ हैं। किसानी मे उन्हे अनुसरण की बात करना हास्यास्पद है।

 

पूर्व सीएम हरीश रावत के बयान पर तंज कसते हुए भट्ट ने इसे परिवारवाद के प्रति निष्ठा और तुष्टिकरण की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि हरदा पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री का भी उल्लेख कर सकते थे, लेकिन वह गान्धी परिवार के इर्द गिर्द अपनी निष्ठा का बखान करते नजर आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के युवराज सीएम धामी ही नही बल्कि देश के किसी भी किसान के अनुकरणीय नही हो सकते। राहुल न खेत, न बीज न ऋतु चक्र न ही खेती किसानी की समझ रखते है। उन्होंने कहा कि सीएम धामी के पिता सैनिक और किसान थे तो दादा और नाना भी किसान रहे हैं। वह बचपन से खेती कार्यों मे लगे रहे है जबकि राहुल ने खेत नही देखे हैं। सीएम धामी के कीचड़ से सने कपड़े कोई आश्चर्य का विषय नही, लेकिन राहुल गाँधी से ऐसी कल्पना बेमानी है। उनका लालन पालन भव्य परिवेश मे हुआ और वह बचपन से जी फाइव स्टार होटल तथा महंगे प्लैन मे यात्रा के अभ्यस्त रहे है।

भट्ट ने कहा कि सच्चे अर्थों मे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ही किसानों सहित हर वर्ग के लिए अनुकरणीय है। पीएम मोदी एक जमींन से उठा व्यक्तित्व है और उन्हे देश ही नही बल्कि विश्व फॉलो करता है। जबकि राहुल गाँधी को कांग्रेसी भी फॉलो नही कर रहे हैं। पार्टी के भीतर कुछ नेता ही निजी स्वार्थ की खातिर उन्हे एक चमत्कारी व्यक्तित्व के रूप मे उनका महिमा मंडन कर रहे है और सच से पूरा देश वाक़िफ़ है।

भट्ट ने कहा कि देश मे किसानों की आय बढ़ाने के लिए पीएम मोदी कई योजनाएं संचालित कर रहे है। किसानो के खाते मे धन आ रहा है। किसानों को अर्थ व्यवस्था की रीढ़ मानते हुए सरकार हर संभव प्रयास मे जुटी है। किसानों की आत्म हत्त्या की दर मे कमी आयी है। कांग्रेस कार्यकाल अथवा उसके नेतृत्व से आज की तुलना नही हो सकती है। खेती किसानी मे राहुल को फॉलो करने का सुझाव चाटुकारिता और आत्ममुग्धता के खोल मे बन्द करने जैसा है।

 

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