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भाजपा सरकार का पूर्व सैनिकों के प्रति असंवेदनशील चेहरा एक बार फिर उजागर, हाईकोर्ट का झटका: पूर्व सैनिकों का हक छीनने वाला जियो रद्द: गरिमा मेहरा दसौनी

भाजपा सरकार का पूर्व सैनिकों के प्रति असंवेदनशील चेहरा एक बार फिर उजागर!
हाईकोर्ट का झटका: पूर्व सैनिकों का हक छीनने वाला जियो रद्द – गरिमा मेहरा दसौनी

 

 

Top court pauses order directing Uttarakhand to shift High Court outside  Nainital - India Today

 

उत्तराखंड की भाजपा सरकार की पूर्व सैनिकों के प्रति असंवेदनशील सोच और कृतघ्न रवैये को आज नैनीताल उच्च न्यायालय ने करारा तमाचा मारा है यह कहना है उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी का।

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दसौनी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ये जानकारी दी कि नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व सैनिकों को राहत देते हुए सरकारी नौकरी में आरक्षण देने वाले सरकार के शासनादेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब पूर्व सैनिकों को हर बार आरक्षण मिलेगा।वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार राज्य सरकार ने 22 मई 2020 को शासनादेश जारी कर कहा था कि जिस पूर्व सैनिक को एक बार राज्य में सरकारी नौकरी में आरक्षण मिल जायेगा तो वो दोबारा आरक्षण का अधिकारी नहीं होगा। इस जीओ को पूर्व सैनिक दिनेश कांडपाल ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि 1993 के एक्ट के तहत पूर्व सैनिक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों व विकलांगों को आरक्षण का प्रावधान है।
दसौनी ने कहा कि 22 मई 2020 को जारी किया गया वह कुख्यात शासनादेश, जिसमें पूर्व सैनिकों को मिलने वाले 5% आरक्षण को एक बार के लाभ तक सीमित करने का आदेश दिया गया था — अब न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया गया है।

गरिमा ने कहा कि यह जियो न केवल 1993 के एक्ट का खुला उल्लंघन था, बल्कि यह उन वीरों का अपमान भी था जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। भाजपा की डबल इंजन सरकार की असली मानसिकता एक बार फिर सामने आ गई है ।
गरिमा ने कहा कि यह सरकार केवल जुमलों और फोटो खिंचवाने तक सीमित है, जब बात सैनिकों के अधिकारों की आती है तो यह सरकार पीछे हट जाती है।
गरिमा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी यह स्पष्ट करना चाहती है कि पूर्व सैनिकों को एक से अधिक बार आरक्षण का लाभ देना न केवल उनका अधिकार है, बल्कि यह देश के प्रति उनके बलिदान की मान्यता भी है।
गरिमा ने कहा कि भाजपा सरकार का यह तर्कहीन और अमानवीय आदेश सैनिकों के भविष्य और सम्मान दोनों पर कुठाराघात था।
दसौनी ने हर्ष जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट का यह निर्णय भाजपा के सैनिक-विरोधी रवैये पर न्याय का तमाचा है।
कांग्रेस प्रवक्ता होने के नाते दसौनी ने भाजपा सरकार से पूछा कि
क्या यही है आपका “सैनिक सम्मान”?
क्या आप पूर्व सैनिकों को राजनीतिक मोहरे से अधिक कुछ मानते भी हैं?
गरिमा ने कहा कि हम माँग करते हैं कि भाजपा को सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए, भविष्य में भाजपा पूर्व सैनिकों के अधिकारों को कुचलने से पहले कानूनी और नैतिक मर्यादाओं का ध्यान रखें। कांग्रेस पार्टी पूर्व सैनिकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए हर मंच पर संघर्ष करती रहेगी।

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