Former governorSatyapal Malik

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, लंबे समय से बीमार थे; आरएमएल अस्पताल में ली अंतिम सांस

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार दोपहर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मलिक ने अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थे।

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके सहयोगी कंवर सिंह राणा ने निधन की पुष्टि की है।

कंवर सिंह राणा ने बताया कि पूर्व राज्यपाल ने दोपहर 1 बजकर 12 बजे दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में अंतिम सांस ली।

कौन थे सत्यपाल मलिक

बागपत के हिसावदा गांव निवासी सत्यपाल मलिक ने मेरठ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान 1965 में छात्र राजनीति में प्रवेश किया। 1966-67 में मलिक मेरठ कॉलेज के पहले छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने भारतीय क्रांति दल का गठन किया। 1974 के विधानसभा चुनाव में बीकेडी के टिकट पर बागपत सीट से चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुंचे।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वे जाट नेताओं के एक प्रमुख नेता के तौर पर देखे जाते थे। जाट समुदाय में उन्हें बहुत इज्जत दी जाती थी। आज भी लोग उनका उसी तरीके से सम्मान करते हैं, जब वे अपने राजनीति के शिखर पर थे।

किसानों की प्रखर आवाज बनकर उभरे जाट नेता सत्यपाल मलिक का मंगलवार को दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में दोपहर 1:12 मिनट पर निधन हो गया। उनके निधन से पूरे देश के साथ-साथ पश्चिमी यूपी में शोक की लहर दौड़ गई है। जाट समुदाय के प्रभावशाली नेता के निधन से जाट राजनीति को भी झटका लगा है। उनके साथ राजनीति करने वाले उनके सहयोगी नेताओं ने सत्यपाल मलिक के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। 

1975 में लोकदल के गठन के बाद उन्हें अखिल भारतीय महामंत्री नियुक्त किया गया। 1980 में लोकदल के प्रतिनिधि के रूप में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। इस बीच उनकी लोकदल के नेताओं से खटपट बढ़ गई, जिसके बाद 1984 में मलिक ने कांग्रेस की सदस्यता ली।

1986 में कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर राज्यसभा भेजे गए और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री नियुक्त किए गए थे। 1987 में बोफोर्स घोटोले से दुखी होकर राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया और जनमोर्चा में शामिल हो गए। 1988 में जनता दल में शामिल हुए और 1991 तक जनता दल के प्रवक्ता और सचिव रहे। 1989 में जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ से सांसद चुने गए। 

मलिक 2004 में भाजपा में शामिल हुए और बागपत लोकसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद 2005-06 में यूपी भाजपा के उपाध्यक्ष बनाए गए। 2009 में भाजपा किसान मोर्चा के अखिल भारतीय प्रभारी बनाए गए।

 

2014 में भाजपा के उपाध्यक्ष रहे और चुनावी घोषणापत्र की उपसमिति में कृषि विषयक मुद्दों के अध्यक्ष रहे। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका रही। चार अक्तूबर 2017 को बिहार का राज्यपाल बनाया गया। 2018 में जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया।

जम्मू-कश्मीर के दसवें और अंतिम राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक

जम्मू-कश्मीर के इतिहास में 23 अगस्त 2018 को सत्यपाल मलिक ने प्रदेश के दसवें और अंतिम राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। वह इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले राजनीतिज्ञ थे। इससे पहले इस संवेदनशील राज्य की कमान हमेशा पूर्व सैन्य अधिकारियों, नौकरशाहों के हाथों में रही थी।

सत्यपाल मलिक का कार्यकाल कई ऐतिहासिक फैसलों और बदलावों का साक्षी भी बना। उनके कार्यकाल में ही केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय हुआ। जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। 

 

इसके साथ ही गवर्नर शासन के दौरान मलिक ने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ सख्त कदम उठाए। उन्होंने वर्षों से रुके पंचायत और निकाय चुनाव करवा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती दी। 

 

विकास कार्यों को गति देने, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए। हालांकि उनका कार्यकाल विवादों से भी अछूता नहीं रहा। पुलवामा हमले, सुरक्षा मामलों और कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर दिए गए उनके बयान राष्ट्रीय राजनीति में बहस का विषय बने।
30 अक्तूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा समाप्त होने के साथ यह केंद्र शासित प्रदेश बन गया। इसी के साथ सत्यपाल मलिक का कार्यकाल भी समाप्त हुआ। वह जम्मू-कश्मीर के अंतिम राज्यपाल रहे।
 
कब क्या रहे सत्यपाल मलिक
वर्ष     जिम्मेदारी 

1974-77    विधायक, बागपत 
1980-84     राज्यसभा सांसद 
1986-89    राज्यसभा सांसद 
1989-91     सांसद, अलीगढ़ 
1990    केंद्रीय राज्य मंत्री 
2017    राज्यपाल, बिहार 
2018    राज्यपाल, जम्मू कश्मीर 
भाषण शैली ने दिलाई पहचान, लोग हैं मुरीद 
किसान आंदोलनों से जुड़े रहे सत्यपाल मलिक की सबसे बड़ी पहचान उनकी भाषण शैली है। मेरठ कॉलेज से उनके भाषण देने की कला के चलते ही युवाओं ने उन्हों हाथों हाथ लिया। चौ. चरण सिंह भी उनकी भाषण कला के कायल थे। भाजपा में रहते हुए उन्हें किसान प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी गई।
चौटाला सीएम बनाए तो दे दिया था त्यागपत्र 
वाक्या साल 1990 का है। हरियाणा में ओमप्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध किया। उनकी बात नहीं सुनी गई तो केंद्रीय मंत्री परिषद से इस्तीफा दे दिया था।    
किसान परिवार में जन्मे और मां ने पाला 
हिसावदा गांव के किसान बुध सिंह के घर 24 जुलाई 1946 को सत्य पाल मलिक का जन्म हुआ। मलिक के बचपन में ही पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनका पालन पोषण उनकी माता जगनी देवी ने किया था। उनके जीवन पर मां की छाप रही। 
 

जानिए, मलिक के परिवार को 
सत्यपाल मलिक की पत्नी इकबाल मलिक पर्यावरणविद् हैं। उनका बेटा देव कबीर ग्राफिक डिजाइनर और पुत्रवधू निविदा चंद्रा हैं। 1980 से ही मलिक का परिवार दिल्ली में रहता है।

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