केरल अब पूर्ण डिजिटल साक्षर राज्य बनकर एक और उपलब्धि जोड़ने जा रहा है. 21 अगस्त को इसकी घोषणा होगी.
केरल पूर्ण साक्षरता हासिल करने वाला पहला भारतीय राज्य होने का गौरव प्राप्त पहले ही कर चुका है. अब यह राज्य देश का पहला पूर्ण डिजिटल साक्षर राज्य बनकर एक और उपलब्धि जोड़ ली है. इसकी आधिकारिक घोषणा मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 21 अगस्त को तिरुवनंतपुरम में करेंगे.

यह उपलब्धि राज्य द्वारा संचालित ‘डिजी केरलम- पूर्ण डिजिटल साक्षरता’ परियोजना के माध्यम से प्राप्त हुई. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि डिजिटल तकनीक का लाभ हर एक नागरिक तक पहुंचे. चाहे उसकी आयु, शिक्षा या आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो.
यह परियोजना तिरुवनंतपुरम जिले की पुल्लमपारा पंचायत से प्रेरित थी. बता दें कि, पुल्लमपारा भारत की पहली पूर्ण डिजिटल रूप से साक्षर पंचायत थी. इसकी सफलता के आधार पर, इस मॉडल को पूरे राज्य में लागू किया गया. इस पहल की योजना और कार्यान्वयन स्थानीय स्वशासन विभाग द्वारा किया गया था, जिसका उद्देश्य डिजिटल सरकारी सेवाओं, ऑनलाइन भुगतान और प्रमाण-पत्र जैसे आधिकारिक दस्तावेज़ों तक पहुंच को सक्षम बनाना था.
![]()
यह परियोजना 2022 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि केरल में स्थानीय स्वशासन द्वारा प्रदान की जाने वाली सभी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हों. यह इस दृष्टिकोण पर आधारित थी कि “जब सेवाएं डिजिटल हो जाएंगी, तो कोई भी नागरिक पीछे नहीं छूटना चाहिए.”
कार्यान्वयन के एक भाग के रूप में, 14 साल और उससे अधिक आयु के उन व्यक्तियों की पहचान की गई जिनमें डिजिटल कौशल की कमी थी और उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया. प्रशिक्षण में स्मार्टफोन का उपयोग, इंटरनेट ब्राउजिंग, वीडियो और ऑडियो कॉल करना, फोटो और वीडियो डाउनलोड करना, यूट्यूब और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग करना, सरकारी ई-सेवाओं तक पहुंच बनाना और बुनियादी बैंकिंग कार्यों को समझना शामिल था.
यह पहुंच व्यापक थी
- 83 लाख से ज्यादा परिवारों के 1.5 करोड़ लोगों का सर्वे किया गया.
- 21,88,398 शिक्षार्थियों की पहचान की गई और 21,87,966 ने प्रशिक्षण पूरा किया.
- इनमें से 21,87,667 व्यक्ति (99.98%) डिजिटल साक्षरता मूल्यांकन में सफल रहे.
जो लोग पहले प्रयास में उत्तीर्ण नहीं हो पाए, उन्हें फिर से प्रशिक्षित किया गया और उनका पुनर्मूल्यांकन किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी पीछे न छूट जाए. इस परियोजना में प्रशिक्षण और मूल्यांकन में सहायता के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन का विकास भी किया गया.
आर्थिक एवं सांख्यिकी मामलों के विभाग द्वारा एक तृतीय-पक्ष मूल्यांकन ने इस पहल की सफलता और पारदर्शिता की पुष्टि की. केरल की यह उपलब्धि एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है, जो शिक्षा और समावेशी डिजिटल शासन में राज्य के नेतृत्व को पुष्ट करती है.

