मंत्री सुबोध उनियाल का बयान सरकार की नाकामी का पुलिंदा : गरिमा मेहरा दसौनी
देहरादून।
उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर की गई प्रेस वार्ता पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। उत्तराखंड कांग्रेस नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने मंत्री के बयान को भाजपा सरकार की जांच में विफलता, नैतिक दिवालियापन और जिम्मेदारी से पलायन का खुला प्रमाण बताया।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि मंत्री का यह कहना कि “साक्ष्य लाओ, सरकार जांच करेगी” पूरी तरह अनुचित और गैर-जिम्मेदाराना है। साक्ष्य जुटाना सरकार और उसकी जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है, न कि शोकाकुल जनता या विपक्ष की।
उन्होंने कहा कि जब सरकार के पास पुलिस, खुफिया तंत्र, एसआईटी, एफएसएल, अभियोजन विभाग, गृह विभाग और पूरा प्रशासनिक ढांचा मौजूद है, तब जनता से साक्ष्य मांगना यह दर्शाता है कि सरकार अपने ही तंत्र पर भरोसा नहीं कर पा रही है।
गरिमा ने स्पष्ट किया कि विपक्ष का संवैधानिक दायित्व सवाल उठाना है, जबकि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि विपक्ष ही साक्ष्य जुटाए, जांच करे और सरकार केवल प्रेस वार्ताएं करती रहे, तो ऐसी सरकार के अस्तित्व का औचित्य ही समाप्त हो जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री सुबोध उनियाल सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर नैतिक जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं। भले ही सीबीआई जांच से इनकार कानूनी तथ्य हो, लेकिन इससे सरकार की राजनीतिक और नैतिक जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती। देश में अनेक ऐसे मामले हैं, जहां नए तथ्यों के आधार पर पुनः जांच कराई गई है।
गरिमा मेहरा दसौनी ने मंत्री के उस बयान को भी आपत्तिजनक बताया, जिसमें कहा गया कि बिना साक्ष्य जांच से दोषियों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच से दोषियों को लाभ मिलने की आशंका है, तो यह साफ संकेत है कि जांच में गंभीर कमियां छोड़ी गई हैं, और यही कांग्रेस का मूल सवाल है।
उन्होंने कहा कि सरकार बुलडोजर कार्रवाई, वीआईपी एंगल और रिकॉर्डिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर लगातार रक्षात्मक रुख क्यों अपनाए हुए है। कांग्रेस जानना चाहती है कि—
बुलडोजर चलाने का आदेश किसने दिया?
रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र और निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच क्यों नहीं कराई गई?
हर सवाल को “षड्यंत्र” बताकर खारिज क्यों किया जा रहा है?
गरिमा ने कहा कि यदि सरकार सच में निर्दोष होती, तो वह सवालों से भागती नहीं और जांच से डरती नहीं।
उन्होंने जनता की आवाज को अपराधियों को बचाने की साजिश बताने को शर्मनाक करार दिया और कहा कि अंकिता उत्तराखंड की बेटी थी। उसके लिए न्याय की मांग करना कोई साजिश नहीं, बल्कि लोकतंत्र का कर्तव्य है। इस तरह के बयान पीड़ित परिवार के दर्द का घोर अपमान हैं।
अंत में गरिमा मेहरा दसौनी ने कांग्रेस की मांगें दोहराते हुए कहा कि—
किसी भी नए तथ्य, रिकॉर्डिंग या साक्ष्य की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच कराई जाए
जांच एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए
सरकार सवालों से भागना बंद करे
“साक्ष्य लाओ” नहीं, बल्कि “सच सामने लाओ” की नीति अपनाई जाए
उन्होंने कहा कि मंत्री की प्रेस वार्ता न्याय की नहीं, बल्कि सरकार की घबराहट को दर्शाती है। कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी और जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा, तब तक सवाल उठते रहेंगे और सरकार को जवाब देना ही पड़ेगा।
