प्रेमनगर में कांग्रेसियों का सैलाब, “अंकिता को न्याय दो” मार्च के साथ जोरदार प्रदर्शन
वीआईपी और साक्ष्य नष्ट करने वालों की CBI जांच की मांग, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
देहरादून।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल वीआईपी और साक्ष्य नष्ट करने वालों की जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई से कराए जाने की मांग को लेकर बुधवार को प्रेमनगर में कांग्रेस का विशाल प्रदर्शन देखने को मिला। सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रेमनगर स्थित सनातन धर्म मंदिर और श्री गुरुद्वारा साहेब ग्राउंड में एकत्रित हुए और वहां से जुलूस के रूप में “अंकिता को न्याय दो” मार्च निकाला।

एआईसीसी सदस्य एवं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में निकली यह न्याय यात्रा प्रेमनगर बाजार से विभिन्न मार्गों से होती हुई प्रेमनगर बारात घर पहुंची। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “सीबीआई जांच कराओ”, “दोषियों को फांसी दो” और “अंकिता को न्याय दो” जैसे नारों से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया। मार्च के कारण कुछ समय के लिए प्रेमनगर बाजार की रफ्तार भी थम गई।
भाजपा पर लगाया महिला विरोधी होने का आरोप
बारात घर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सूर्यकांत धस्माना ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा को मूलतः महिला विरोधी पार्टी करार देते हुए कहा कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां महिलाओं के खिलाफ अपराधों की घटनाएं सबसे अधिक सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भाजपा से जुड़े कई छोटे-बड़े नेता और पदाधिकारी शामिल पाए गए हैं।
शुरू से ही मामले को दबाने की कोशिश
धस्माना ने कहा कि अंकिता भंडारी की व्हाट्सऐप चैट में वीआईपी को विशेष सेवाएं देने का स्पष्ट उल्लेख था और जिस रिसॉर्ट में घटना हुई, वह भाजपा नेता का था। इसके बावजूद शुरू से ही मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि घटनास्थल के साक्ष्य मिटाए गए और एसआईटी जांच में वीआईपी तथा साक्ष्य नष्ट करने वालों को बचाया गया।
उन्होंने कहा कि अब जब भाजपा के ही लोगों द्वारा वीआईपी की पहचान सामने आई है, तब पूरे प्रदेश की जनता एक स्वर में मांग कर रही है कि मामले की अग्रिम जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई से कराई जाए।
मुख्यमंत्री के बयान से जनता निराश
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के हालिया बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा यह कहना कि सरकार वही जांच कराएगी जो अंकिता के माता-पिता चाहेंगे, प्रदेश की जनता को निराश करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड की महिला अस्मिता से जुड़ा है और मुख्यमंत्री को अविलंब केंद्र सरकार को सीबीआई जांच की संस्तुति भेजनी चाहिए।
सरकार नहीं मानी तो आंदोलन होगा और तेज
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के खुलासे को लेकर आज पूरा जनमानस आंदोलित है, लेकिन भाजपा सरकार आंख-कान बंद किए बैठी है। उन्होंने कहा कि चाहे तराई हो या पहाड़, हर जगह अंकिता प्रकरण की गूंज है। अगर सरकार शीघ्र सीबीआई जांच की संस्तुति नहीं करती है, तो कांग्रेस आंदोलन को और अधिक तेज करेगी।
इन नेताओं की रही प्रमुख मौजूदगी
न्याय यात्रा में प्रदेश कांग्रेस महामंत्री जगदीश धीमान, श्रम विभाग अध्यक्ष दिनेश कौशल, प्रदेश युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष सुमित खन्ना, पूर्व पार्षद जितेंद्र तनेजा, अभिषेक तिवारी, कोमल वोहरा, अनिल बस्नेत, सुशीला शर्मा, मोहित ग्रोवर, दिवान सिंह बिष्ट, पूनम कंडारी, किशोर उनियाल, आशीष देसाई, कार्तिक बिरला, कैलाश वाल्मीकि, सरोज भाटिया, सायरा बानो, ज्योति चौधरी, सन्नी कुमार, कुलदीप नरूला सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
