पिटकुल एमडी नियुक्ति विवाद: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जारी घटनाक्रम पर उठे गंभीर सवाल
नियमों में बदलाव और नियुक्ति प्रक्रिया पर जन प्रहार ने उठाए सवाल, पारदर्शिता की मांग
देहरादून।
पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) के प्रबंध निदेशक (एमडी) पद पर हुई नियुक्ति, माननीय उच्च न्यायालय के आदेश और उसके बाद हुए प्रशासनिक घटनाक्रमों को लेकर शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूरे मामले में विभिन्न तिथियों पर हुए घटनाक्रमों ने इस प्रकरण को और विवादित बना दिया है।

घटनाक्रम क्रमवार
18 फरवरी 2026
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पिटकुल के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए उसे निरस्त (Set Aside) कर दिया।
22 फरवरी 2026
जन प्रहार ने प्रेस वार्ता कर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल उठाए।
23 फरवरी 2026
मामले की जानकारी महालेखा परीक्षक (Auditor General) को भेजी गई, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो सके।
24 फरवरी 2026
मुख्य सचिव से मुलाकात कर मामले से अवगत कराया गया और न्यायालय के आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया।
26 फरवरी 2026
कैबिनेट बैठक के निर्णय सार्वजनिक किए गए, लेकिन राज्य के तीनों ऊर्जा निगमों के प्रबंध निदेशक और निदेशक पदों के नियमों में किए गए बदलाव सार्वजनिक नहीं किए गए।
27 फरवरी 2026
मामले में अवमानना (Contempt) की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार से कड़ा सवाल किया कि जब नियुक्ति निरस्त हो चुकी है तो संबंधित अधिकारी को अब तक पद से क्यों नहीं हटाया गया। अदालत ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को समन जारी करते हुए 19 मार्च 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया।
इसी दिन जन प्रहार ने पिटकुल मुख्यालय के बाहर ऊर्जा मंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया।
27 फरवरी 2026 के बाद सामने आई जानकारी
सरकारी स्तर पर एमडी पद की नियुक्ति निरस्त करने से संबंधित एक आदेश जारी होने की जानकारी सामने आई, जिसमें आदेश की तिथि 26 फरवरी 2026 अंकित बताई गई।
3 मार्च 2026
पिटकुल और यूपीसीएल में निदेशक पदों पर नियुक्ति के लिए चल रही चयन प्रक्रिया के तहत साक्षात्कार स्थगित होने की खबर सामने आई।
7 मार्च 2026
ऊर्जा अनुभाग-2 के कार्यालय से तीनों निगमों—PTCUL, UPCL और UJVNL—के प्रबंध निदेशकों और निदेशकों की नियुक्ति संबंधी नियमों में बदलाव के तीन अलग-अलग कार्यालय ज्ञापन 05 मार्च 2026 दिनांकित जारी किए गए।
नियमों में बदलाव पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार सरकार अब पिटकुल के एमडी पद के लिए नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है और जल्द ही इसका विज्ञापन जारी किया जा सकता है। आरोप है कि पात्रता शर्तों में बदलाव कर किसी विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
विशेष रूप से यह सवाल भी उठ रहा है कि:
आवेदन की आयु सीमा 45–58 वर्ष से बढ़ाकर 45–60 वर्ष क्यों की गई?
तकनीकी पद के लिए टेक्निकल क्वालिफिकेशन की अनिवार्यता क्यों समाप्त की गई?
इसके साथ ही यह भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि जब 27 फरवरी को न्यायालय में अवमानना की सुनवाई हुई, उसके बाद भी जिस आदेश में अधिकारी को हटाने की बात कही गई उसमें तिथि 26 फरवरी अंकित बताई जा रही है।
जन प्रहार की मांग
जन प्रहार ने पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग करते हुए सरकार से निम्न मांगें रखी हैं:
पिटकुल एमडी पद से जुड़े सभी आदेश और निर्णय सार्वजनिक किए जाएं।
नियमों में किए गए बदलाव की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
न्यायालय के आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट की जाए।
यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
आयु सीमा और योग्यता में किए गए बदलावों का स्पष्ट कारण बताया जाए।
प्रेस वार्ता में मौजूद लोग
प्रेस वार्ता को इस मामले में पक्षकार दीप्ति पोखरियाल, सुजाता पॉल और अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने संबोधित किया।
जन प्रहार का आरोप है कि यदि नियमों में बदलाव किसी एक अधिकारी को बचाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं तो यह प्रशासनिक सिद्धांतों और न्यायिक व्यवस्था की भावना के विपरीत होगा।
