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बिजली-पानी की बढ़ती दरों के विरोध में हरीश रावत का मौन उपवास, 15 दिन तक राजनीति और मीडिया से दूरी

बिजली-पानी की बढ़ती दरों के विरोध में हरीश रावत का मौन उपवास, 15 दिन तक राजनीति और मीडिया से दूरी

देहरादून
उत्तराखंड में बिजली और पानी की संभावित बढ़ती दरों के विरोध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सांकेतिक मौन उपवास शुरू किया है। उन्होंने नवरात्रि के अवसर पर अपने देहरादून स्थित डिफेंस कॉलोनी आवास पर यह उपवास रखते हुए 15 दिनों तक सभी राजनीतिक कार्यक्रमों और मीडिया से दूरी बनाने का ऐलान किया है।

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हरीश रावत ने कहा कि उनका यह मौन व्रत उन लाखों लोगों को समर्पित है, जो बिजली और पानी की लगातार बढ़ती दरों से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि भले ही वर्तमान में दरों में वृद्धि लागू नहीं हुई है, लेकिन आम उपभोक्ता पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है।

उन्होंने मां जगदंबा से प्रार्थना करते हुए कहा कि ऐसा समाधान निकले जिससे आम जनता को राहत मिल सके। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी 15 दिनों तक वे किसी भी राजनीतिक गतिविधि, सार्वजनिक कार्यक्रम या प्रेस वार्ता में हिस्सा नहीं लेंगे और इस समय को आत्ममंथन के रूप में देख रहे हैं।

बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में 1 अप्रैल से बिजली और पानी के बिलों में बढ़ोतरी की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी पड़ेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले भी हरीश रावत विभिन्न मांगों को लेकर मौन उपवास कर चुके हैं। बीते महीने उन्होंने बिंदुखत्ता समेत कई क्षेत्रों को राजस्व गांव का दर्जा देने और भूमिहीनों व आपदा पीड़ितों को अधिकार दिलाने की मांग को लेकर गांधी पार्क में सांकेतिक उपवास किया था।

हरीश रावत के इस कदम को बिजली-पानी की बढ़ती दरों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि उनके इस मौन उपवास का सरकार की नीतियों पर कितना असर पड़ता है।