उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसुनवाई में 10 मामलों पर सुनवाई, विभागों को सख्त निर्देश
ओबीसी आयोग की जनसुनवाई में 10 मामलों पर सुनवाई, विभागों को सख्त निर्देश
भूमि कब्जा, नियुक्ति, पेंशन और राशन दुकान से जुड़े मामलों पर हुई कार्रवाई

देहरादून।
भारत केसरी
उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग में सोमवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रदेशभर से आए 10 अलग-अलग शिकायतों पर सुनवाई की गई। आयोग अध्यक्ष संजय नेगी की अध्यक्षता में हुई इस सुनवाई में भूमि कब्जा, नियुक्ति, वेतन भुगतान, पेंशन, राशन दुकान और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों पर विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
आयोग अध्यक्ष संजय नेगी ने सभी शिकायतकर्ताओं की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित विभागों से मामलों की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली।
टिहरी गढ़वाल निवासी नंदिनी गुसाईं के भूमि कब्जे से जुड़े मामले में पुलिस विभाग ने आयोग को बताया कि मामला सिविल प्रकृति का है। आयोग को जानकारी दी गई कि भूमि की स्थिति स्पष्ट होने और सक्षम मजिस्ट्रेट के आदेश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता को सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिया गया।
देहरादून निवासी सरोज कुमार के सामान वापस दिलाने के मामले में आयोग ने पुलिस विभाग को दोनों पक्षों की सुनवाई कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
वहीं हरिद्वार निवासी सतीश कुमार के नियुक्ति और वेतन भुगतान मामले में आयोग ने उत्तराखंड वन विकास निगम को सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए 15 दिन के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।
हरिद्वार निवासी अहसान अंसारी द्वारा सरकारी राशन की दुकान खोले जाने की शिकायत पर आयोग ने खाद्य विभाग को सकारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही आयोग सदस्य सज्जाद अहमद को जिला पूर्ति अधिकारी के साथ समन्वय बनाकर मामले का जल्द निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।
देहरादून निवासी वासुदेव कुशवाहा के एसजीएचएस कटौती मामले में आयोग ने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। साथ ही भविष्य में इस तरह की शिकायतें न आएं, इसके लिए सभी विभागों को योजना की जानकारी व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा पुरानी पेंशन, नियुक्ति और धोखाधड़ी से जुड़े अन्य मामलों में भी आयोग ने संबंधित विभागों से जवाब तलब कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। जिन मामलों में प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन पाए गए, उन्हें नियमानुसार निस्तारित करने के निर्देश दिए गए।
सुनवाई के दौरान तीन शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। इस दौरान आयोग के उपाध्यक्ष श्याम डोभाल, सचिव गोरधन सिंह समेत कई सदस्य और कर्मचारी मौजूद रहे।
