कांवड़ यात्रा के दौरान पीईटी रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए एपीआर भारत ने शुरू की ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’
मुज़फ्फरनगर | 5 अगस्त 2026
एसोसिएशन ऑफ पीईटी रीसाइक्लर्स भारत (एपीआर भारत) ने कांवड़ यात्रा के दौरान प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार निपटान और पीईटी बोतलों की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ नामक विशेष जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि उपयोग के बाद फेंकी गई पीईटी बोतल कचरा नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए एक मूल्यवान संसाधन है।

15 दिनों तक चलने वाले इस पायलट अभियान के तहत एक विशेष रूप से तैयार की गई जागरूकता वैन मुज़फ्फरनगर और मेरठ में कांवड़ यात्रा मार्ग के चार प्रमुख स्थानों पर संचालित की जाएगी। अभियान के माध्यम से श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार निपटान, पीईटी बोतलों के पृथक संग्रह और रीसाइक्लिंग के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। अभियान के दौरान एकत्रित की गई बोतलों को औपचारिक रीसाइक्लिंग प्रणाली तक पहुंचाया जाएगा, ताकि उनका दोबारा उपयोग किया जा सके।
यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है जब केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा की बचत, आयात पर निर्भरता कम करने और आयात-निर्भर पेट्रोकेमिकल उत्पादों के स्वदेशीकरण पर विशेष जोर दे रही है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच रीसाइक्ल्ड पीईटी (आर-पीईटी) का उपयोग संसाधन सुरक्षा, आयात में कमी और घरेलू पैकेजिंग उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एपीआर भारत के डायरेक्टर जनरल गौतम जैन ने कहा कि ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ का उद्देश्य रीसाइक्लिंग को लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है। उन्होंने कहा, “उपयोग के बाद फेंकी गई पीईटी बोतल अपनी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नई बोतल बनने की शुरुआत हो सकती है। कांवड़ यात्रा हमें लाखों लोगों तक यह संदेश पहुंचाने का अनूठा अवसर देती है कि जिम्मेदार उपयोग के साथ-साथ जिम्मेदार निपटान भी उतना ही आवश्यक है। हमारा प्रयास केवल प्लास्टिक कचरे की समस्या बताना नहीं, बल्कि यह दिखाना भी है कि संग्रहित पीईटी बोतलें किस प्रकार रीसाइक्लिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनकर सर्कुलर अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं।”
उन्होंने बताया कि सरकार ने वर्ष 2026-27 तक प्लास्टिक पैकेजिंग में 40 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री के उपयोग को अनिवार्य किया है। हालांकि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक जनभागीदारी और जागरूकता की आवश्यकता है।
अभियान के तहत संचालित जागरूकता वैन एक मोबाइल सूचना एवं संग्रह केंद्र के रूप में कार्य करेगी, जहां लोगों को पीईटी बोतलों को अलग-अलग एकत्रित करने और उनके वैज्ञानिक निपटान की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। एपीआर भारत भविष्य में इस अभियान का विस्तार पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिण भारत के अन्य प्रमुख क्षेत्रों तक करने की योजना भी बना रहा है।
गौतम जैन ने कहा कि वैश्विक पॉलिमर आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता और भारत की बढ़ती घरेलू रीसाइक्लिंग क्षमता के इस दौर में रीसाइक्लिंग केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह संसाधन-सक्षम, सर्कुलर और आत्मनिर्भर विनिर्माण व्यवस्था के निर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि रीसाइक्लिंग के लिए भेजी गई प्रत्येक पीईटी बोतल देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण—दोनों को लाभ पहुंचाने वाले एक महत्वपूर्ण संसाधन का प्रतिनिधित्व करती है।
एसोसिएशन ऑफ पीईटी रीसाइक्लर्स भारत (एपीआर भारत) भारत में फूड-ग्रेड पीईटी (पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट) की जिम्मेदार रीसाइक्लिंग से जुड़ी कंपनियों का प्रमुख उद्योग संगठन है, जो देश में टिकाऊ पैकेजिंग और सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है।
