सड़क पर आवारा पशु दिखे तो होगी कार्रवाई! डीएम ने दिए सख्त निर्देश
भारत केसरी
देहरादून में आवारा पशुओं की समस्या को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में एबीसी-एआरवी कार्यक्रम और निराश्रित एवं पालतू पशुओं के प्रभावी प्रबंधन को लेकर डीएम ने अधिकारियों के साथ बैठक की।

जिलाधिकारी ने नगर निकायों को आवारा श्वानों और अन्य पशुओं की संख्या का विस्तृत सर्वे कर पूरा डेटा तैयार करने और पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर श्वानों के बंध्याकरण, टीकाकरण और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
डीएम ने पालतू कुत्तों का अनिवार्य पंजीकरण कराने पर भी जोर दिया। वहीं डोईवाला, विकासनगर और ऋषिकेश में श्वानों के बंध्याकरण और शल्य चिकित्सा के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।
सड़क पर गोवंश छोड़ा तो कार्रवाई तय
सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गोवंश को लेकर भी जिलाधिकारी ने नगर निकायों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लावारिस गोवंश को कांजीहाउस पहुंचाकर उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित की जाए। वहीं सड़कों पर गोवंश छोड़ने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
55 हजार से ज्यादा स्ट्रीट डॉग का बंध्याकरण
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि देहरादून नगर निगम क्षेत्र में अब तक 55,487 स्ट्रीट डॉग का बंध्याकरण किया जा चुका है। वर्तमान में 72 डॉग केनल बनाए गए हैं, जबकि 144 केनल का निर्माण चल रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद करीब 300 श्वानों को रखने की क्षमता उपलब्ध होगी।
वहीं नगर निगम क्षेत्र में निराश्रित श्वानों के लिए 25 डॉग फीडिंग स्पॉट बनाए गए हैं और 1,117 पालतू श्वानों के लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं।
883 निराश्रित गोवंश कांजीहाउस में संरक्षित
निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए केदारपुरम कांजीहाउस में 347 और सेलाकुई के शंकरपुर कांजीहाउस में 536 गोवंशीय पशुओं की देखभाल की जा रही है। पशुओं को पकड़ने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम के साथ चार पशुवाहन भी तैनात किए गए हैं।
इसके अलावा मार्च 2026 से अब तक नगर निगम देहरादून क्षेत्र में 109 बंदरों को पकड़कर सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ा गया है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आवारा पशुओं की समस्या के समाधान में लापरवाही न बरती जाए और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए धरातल पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
