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सैन्यधाम की बढ़ती लागत और देरी पर कांग्रेस के सवाल, मंत्री गणेश जोशी से इस्तीफे की मांग

देहरादून: देहरादून में बन रहे सैन्यधाम को लेकर अब उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग ने राज्य सरकार से खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि सैन्यधाम सिर्फ एक निर्माणाधीन परियोजना नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों और शहीदों की स्मृति एवं सम्मान का प्रतीक है। ऐसे में इसके निर्माण में होने वाले हर खर्च और हर फैसले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।

 

कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण में हो रही देरी और लगातार बढ़ती लागत को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

कर्नल नेगी के अनुसार, सैन्यधाम की घोषणा वर्ष 2019 में की गई थी। इसके बाद जनवरी 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसका शिलान्यास किया। वहीं दिसंबर 2021 में तत्कालीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुनियालगांव में सैन्यधाम का दूसरा शिलान्यास किया था।https://youtu.be/k31D0Z318EE?si=iyCQhm0DMSw7adSa

उस समय परियोजना की लागत करीब 63 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसे लगभग दो वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। सैन्यधाम के लिए शहीद सम्मान यात्रा के माध्यम से 1,734 शहीद परिवारों के आंगन की पवित्र मिट्टी भी लाई गई थी।

लेकिन कांग्रेस का दावा है कि बाद के वर्षों में परियोजना की लागत को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। आरटीआई आधारित जानकारी में वर्ष 2022 में लागत करीब 48 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि वर्ष 2024 में सामने आई रिपोर्टों में यह बढ़कर करीब 99 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई।

कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि आखिर परियोजना की लागत में इतनी बढ़ोतरी क्यों हुई? मूल डीपीआर क्या थी, संशोधित डीपीआर कब स्वीकृत हुई और अतिरिक्त खर्च को किस प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई?

कर्नल रामरतन नेगी ने सरकार से मूल और संशोधित डीपीआर, वित्तीय स्वीकृतियां, टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, अतिरिक्त कार्यों की मंजूरी, भुगतान का विवरण और गुणवत्ता जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2021 में सैन्यधाम को लगभग दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, तो अब तक निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हो पाया और देरी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?

वहीं, सैन्यधाम के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी के कथित ‘चुनावी लाभ’ वाले बयान को लेकर भी कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। कर्नल नेगी ने कहा कि सैन्यधाम किसी राजनीतिक दल की चुनावी उपलब्धि नहीं, बल्कि देश के सैनिकों और शहीद परिवारों के सम्मान से जुड़ा स्मारक है।

कांग्रेस ने मंत्री गणेश जोशी के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।

इस दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुजाता पॉल ने कहा कि सैन्यधाम में लाई गई शहीद परिवारों के आंगन की मिट्टी किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सैनिक की निष्ठा किसी राजनीतिक पार्टी के प्रति नहीं, बल्कि भारत माता और देश की रक्षा के प्रति होती है।

कांग्रेस का कहना है कि शहीदों की शहादत और उनकी मिट्टी को राजनीतिक लाभ से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

पूर्व सैनिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह सैन्यधाम की पारदर्शिता, शहीदों के सम्मान और सैन्य परिवारों के अधिकारों के मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा।