Uttrakhand

हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, PIL निस्तारित; पुलिस जांच में दखल से इनकार

देहरादून, 7 सितंबर। उत्तराखंड के बहुचर्चित हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद में नैनीताल हाईकोर्ट ने सोमवार को दायर जनहित याचिका (PIL) का निस्तारण कर दिया। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले में राज्य सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए पुलिस जांच में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

 

सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और घटना से संबंधित CCTV फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि विवाद के संबंध में दो एफआईआर दर्ज हैं। इनमें एक हल्द्वानी में और दूसरी बेंगलुरु में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज की गई है, जिसे जांच के लिए हल्द्वानी स्थानांतरित किया जाएगा।

 

 

पुलिस जांच में दखल देने से हाईकोर्ट का इनकार

अदालत के समक्ष सरकार की ओर से निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिए जाने के बाद खंडपीठ ने पुलिस को अपनी जांच प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया और PIL को निस्तारित कर दिया। यानी अदालत ने इस स्तर पर जांच के लिए किसी अलग एजेंसी या न्यायिक निगरानी का आदेश नहीं दिया।

सामाजिक सौहार्द और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग

यह PIL देहरादून के सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ चौहान की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से घटना से जुड़े CCTV फुटेज, वीडियो और अन्य दस्तावेजी एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई थी। याचिका में आशंका जताई गई थी कि घटना को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों के बीच सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।

8 अगस्त को हुई थी खरगे की जनसभा

मामला 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद सामने आया। तीन दिन बाद 11 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों की ओर से वहां गंगाजल छिड़कने और हवन किए जाने की बात सामने आई।

आयोजकों की ओर से इसे स्थल की स्वच्छता और धार्मिक पवित्रता से जुड़ा कार्यक्रम बताया गया, जबकि कांग्रेस ने इसे खरगे के दलित समुदाय से होने के संदर्भ में ‘छुआछूत’ और सामाजिक भेदभाव से जोड़ते हुए कड़ा विरोध जताया। खरगे ने भी बाद में इस मुद्दे को संसद में उठाया।

विवाद के बाद बढ़ी राजनीतिक तल्खी

घटना के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए। कांग्रेस ने इसे सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि भाजपा ने कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक और जातिगत रंग देने का आरोप लगाया।

विवाद के बीच राहुल गांधी के खिलाफ भी हल्द्वानी में मामला दर्ज हुआ। वहीं, बेंगलुरु में भी इस प्रकरण को लेकर जीरो एफआईआर दर्ज की गई। इससे मामला उत्तराखंड की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया।

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कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मामले की जांच पुलिस की तय कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी। अदालत ने फिलहाल पुलिस जांच में हस्तक्षेप नहीं किया है और राज्य सरकार के निष्पक्ष जांच तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के आश्वासन को स्वीकार करते हुए PIL का निस्तारण कर दिया है।

ऐसे में हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक बहस के और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस इसे सामाजिक समानता और दलित सम्मान का मुद्दा बता रही है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक रूप से तूल दिए जाने का आरोप लगा रही है। सोमवार को कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच का कार्यक्रम भी आयोजित किया, जहां पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनी।