महंगाई के बीच UPI चार्ज को लेकर धस्माना का केंद्र पर हमला, बोले- आम आदमी पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
देहरादून, 16 सितंबर 2026। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं AICC सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने महंगाई और UPI पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आम जनता पहले से बढ़ती कीमतों से परेशान है और अब डिजिटल भुगतान व्यवस्था में नए शुल्क से छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
धस्माना ने कहा कि हालिया सरकारी आंकड़े महंगाई के दबाव को दर्शाते हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय के अनुसार अगस्त 2026 के लिए WPI की नई श्रृंखला के आंकड़े जारी किए गए हैं। वहीं, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने भी अगस्त 2026 के CPI आंकड़े जारी किए हैं।
महंगाई के आंकड़ों का दिया हवाला
धस्माना ने दावा किया कि अगस्त में थोक महंगाई दर 9.92 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने ईंधन एवं बिजली तथा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए कहा कि इसका असर आगे चलकर उपभोक्ताओं के बजट पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने खुदरा महंगाई के आंकड़ों का भी उल्लेख किया और कहा कि अगस्त में CPI आधारित महंगाई 4.82 प्रतिशत रही। धस्माना के मुताबिक खाद्य वस्तुओं, विशेषकर सब्जियों और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा है।
UPI के नए MDR को लेकर सवाल
कांग्रेस नेता ने 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए UPI Merchant Discount Rate (MDR) का भी विरोध किया। नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। MDR का भुगतान व्यापारी की ओर से भुगतान व्यवस्था में किया जाएगा और सरकार ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि व्यापारी यह लागत ग्राहक पर न डालें। वहीं, Person-to-Person (P2P) UPI भुगतान और ₹2,000 तक के P2M भुगतान इस MDR से बाहर रहेंगे।
धस्माना ने कहा कि कागज पर शुल्क व्यापारी पर लागू होने के बावजूद छोटे कारोबारियों पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आशंका जताई कि व्यापारी बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए अपने कारोबार में अन्य तरीके अपना सकते हैं।
नोटबंदी और GST का भी उठाया मुद्दा
धस्माना ने नोटबंदी और GST को लेकर भी केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का असर आम आदमी और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि महंगाई के दौर में सरकार को आम जनता को राहत देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। धस्माना ने केंद्र सरकार से कीमतों पर नियंत्रण और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
