पद्मविभूषित सुंदरलाल बहुगुणा की स्मृति सम्मान समारोह में सोनम वांगचुक बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
सरकार और दल कोई भी हो, सभी विनाश में लगी हुई है। इसके लिए किसी एक दल को दोष देना बेकार है। हम किसी दल से जुड़े होते हैं तो कहते हैं कि ये सरकार ठीक है। जबकि हमारा दायित्व है कि काेई भी सरकार किसी भी दल की हो चाहे विरोधी हो या आपके अपने दल की, अगर वो गलत करे तो उसे गलत कहना होगा। जिस तरह विकास हो रहा है, इसकी नीति दूरदर्शिता के साथ नहीं है।

चार दिन की चांदनी के बाद लोगों को ही इसका नुकसान भुगतना होगा। मशाल लेकर समाज में बदलाव लाने की जरूरत है, तभी जैसा लोग चाहेंगे सरकार भी वैसा ही करेगी। ये बातें सोनम वांगचुक ने नगर निगम में आयोजित कार्यक्रम में कही। बुधवार को नगर निगम के टाउन हॉल में हिमालय बचाओ आंदोलन और पर्वतीय नव जीवन मंडल आश्रम की ओर से पद्मविभूषित सुंदरलाल बहुगुणा की चौथी पुण्यतिथि पर हिमालय प्रहरी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें भारतीय इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
वहीं उन्होंने भारत केसरी से बात करते हुए कहा कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए हमारी बातचीत चल रही है, और साथ ही शिक्षा का बदलाव जिस प्रकार से हो रहा है समझ में नहीं है..
शिक्षा में अहम भूमिका निभा रहे सोनम वांगचुक , शिक्षा के संबंध यह कहा कि शिक्षा में बदलाव तो आ रही है लेकिन जमीनी स्तर पर अभी काम नहीं दिख रहा सिर्फ ऊपर ऊपर और पश्चिमी सभ्यता से जुड़ी हुई शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है
उन्होंने कहा कि लद्दाख एक दुर्गम क्षेत्र है। वहां के लोग दिन में सिर्फ 5 से 10 लीटर पानी इस्तेमाल करते हैं। जब शहर के लोग वहां पहुंचेंगे तो उन्हें 200 से 500 लीटर प्रतिदिन पानी चाहिए। लद्दाख उन्हें इतना पानी नहीं दे पाएगा। इसी तरह की तमाम दूसरी विसंगतिया भी लद्दाख में पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि 27 मई को इस संबंध में केंद्र सरकार के साथ उनकी बातचीत होनी है। यदि यह बातचीत उनके पक्ष में नहीं हुई तो लद्दाख को अलग राज्य का दर्जा देने के लिए आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा ने कहा कि जो स्थितियां लद्दाख में हैं। कमोबेश वही स्थितियां उत्तराखंड में भी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन का साक्षी रहा है। लद्दाख के राज्य आंदोलन की लड़ाई में उत्तराखंड हमेशा उनके साथ रहेगा।
उन्होंने भारत की सरकार और राजनीति को मां की ममता के एक बेहतर उदाहरण से समझाया। कहा कि दलों को उनके गलत कामों के लिए ताली बजाकर सहयोग करने की बजाय उनका साथ मत दें। आप किसी के प्रति वफा रखते हैं तो सच्ची वफा रखें। शुभचिंतक वही है जो सही को सही कहे और गलत को गलत कहे। इच्छाएं ही मनुष्य के विनाश का कारण बनती है। शहर की अय्याशी के लिए गांव के जीवन को उजाड़ा जा रहा है। शहरों में जरूरत भी नहीं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग घरों में एसी लगा रहे हैं। वहीं, जनकवि अतुल शर्मा ने नदी तू बहती रहना गीत की सुंदर प्रस्तुति दी। स्व. सुंदरलाल बहुगुणा के पुत्र राजीव नयन बहुगुणा ने कहा कि वैज्ञानिक ही अंधेरे से विकास को जगमग संसार में लाए, वही आज प्रकृति के दुश्मन बने हुए हैं। विश्व के पहाड़ संकट में हैं। कहा कि वह सोनम वांगचुक को अपने पिता की एक भुजा और सिर मानते हैं। इस मौके पर कमला पंत, समीर रतूड़ी, मधु पाठक, अरविंद, अनूप नौटियाल, कई दिग्गज पत्रकार बारामासा के राहुल कोटियाल आदि मौजूद रहे।

