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“ऑपरेशन सिंदूर” की सफलता: भारतीय सेना को राष्ट्र की ओर से नमन :

भारतीय सेना ने हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि वह देश की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है। भारतीय सेना के साहस शौर्य और पराक्रम को नमन करने के लिए और भारतीय सेना का आभार ज्ञापित करने के लिए उत्तराखंड युवा कांग्रेस ने शौर्य सम्मान यात्रा का आयोजन किया। इस आयोजन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत सेना ने न केवल रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त किया, बल्कि दुर्गम परिस्थितियों में साहस, अनुशासन और तकनीकी कुशलता का उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

 


इस अभूतपूर्व सफलता के लिए सम्पूर्ण राष्ट्र भारतीय सेना के जांबाज जवानों के प्रति हृदय से कृतज्ञता ज्ञापित करता है। सेना के अदम्य साहस, धैर्य और प्रतिबद्धता ने देशवासियों में गर्व और आत्मविश्वास का संचार किया है।
रक्षा मंत्रालय ने भी “ऑपरेशन सिंदूर” को देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है और इसमें सम्मिलित सभी अधिकारियों एवं जवानों की सराहना की है। इस अवसर पर देश के कोने-कोने से नागरिकों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और युवाओं ने सेना के प्रति अपना आदर और आभार व्यक्त किया है।
भारतीय सेना की यह सफलता उन सभी वीर जवानों को समर्पित है जो निःस्वार्थ भाव से मातृभूमि की सेवा में संलग्न हैं। राष्ट्र उनके बलिदान और समर्पण को नमन करता है।

 


प्रधानमंत्री मोदी पिछले 11 वर्षों से लगातार विदेश यात्राएँ कर रहे हैं, लेकिन जब भारत को पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की ज़रूरत थी, तब कोई भी देश हमारे समर्थन में सामने नहीं आया।
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 11 वर्षों में 151 विदेश यात्राएँ की हैं और 72 देशों का दौरा किया है, जिनमें से अमेरिका का दौरा 10 बार किया गया। फिर भी मोदी सरकार की विदेश नीति के अंतर्गत हमारा देश अकेला खड़ा है। क्या प्रधानमंत्री का काम केवल विदेश जाकर फोटो खिंचवाना है?

 

 

 


इस दौरान वहां उपस्थित उत्तराखंड पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वर्तमान में चकराता से विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि IMF ने पाकिस्तान को $1.4 बिलियन का बेलआउट लोन दिया, लेकिन भारत के पक्ष में कोई नहीं बोला।
हमारी सेना जब आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी, उसी समय अचानक सीज़फायर की घोषणा कर दी गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कहकर हमारे देश का अपमान किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीज़फायर कराया। उन्होंने यह बयान दस से भी अधिक बार दोहराया। पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई में एकजुट था, लेकिन मोदी जी अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों पर स्पष्टता देने से लगातार बच रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय सांसद प्रतिनिधिमंडल को विदेश भेजने की बात अचानक उठाई ताकि वे खुद से जुड़े कठिन सवालों से ध्यान हटा सकें, जबकि उनकी वैश्विक छवि बुरी तरह प्रभावित हुई है।
इस दौरान वक्ताओं ने मोदी सरकार से सवाल किए..
पहलगाम हमले के आतंकियों को अभी तक क्यों नहीं पकड़ा गया?
सरकार सांसदों को विदेश भेज रही है लेकिन हमलावरों को सज़ा क्यों नहीं दिला पा रही?
पाकिस्तान के साथ बीजेपी का अतीत पर भी सवाल उठे
2005 में लालकृष्ण आडवाणी ने जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष क्यों बताया?
मोदी जी 2015 में नवाज़ शरीफ़ से बिना निमंत्रण के दोपहर का भोजन करने क्यों गए? ISI से जुड़े जासूस भारत में पकड़े गए। पहले DRDO के प्रदीप कुरुलकर (RSS से जुड़े) और बीजेपी के ध्रुव सक्सेना को भी पकड़ा गया। उन मामलों का क्या हुआ?
विदेश नीति की विफलता पर भी मौजूद वक्ताओं ने सवाल किए
मोदी सरकार ने 60-70 वर्षों की कूटनीतिक निरंतरता क्यों तोड़ी?
प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, चीन, कतर, अमेरिका और यूके जैसे देशों में कांग्रेस पर हमला क्यों किया?
अगर विदेश नीति मजबूत है तो विदेश में प्रतिनिधिमंडल भेजने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
अमेरिका की भूमिका और सीज़फायर पर भी जोरदार हमला बोला
सीज़फायर की घोषणा भारत या पाकिस्तान की बजाय अमेरिका के राष्ट्रपति ने क्यों की?अगर यह भारत का निर्णय था, तो अमेरिका ने इसकी घोषणा क्यों की?
भारत ने वॉशिंगटन को कूटनीतिक स्थान क्यों सौंपा?
ऑपरेशन सिंदूर और नागरिक सुरक्षा पर भी सवाल उठे
पहलगाम के चार हत्यारे अब तक क्यों नहीं पकड़े गए?
सीज़फायर से पहले पाकिस्तान से उन्हें सौंपने की माँग क्यों नहीं की गई?
ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने से पहले सीमा क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को क्यों नहीं निकाला गया?
अगर भारत ने समय चुना, तो नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं की गई?
नागरिकों की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
विदेश मंत्री जयशंकर ने यह क्यों कहा कि भारत ने कार्रवाई से पहले पाकिस्तान को सूचित किया?
“सूचित करना” वास्तव में क्या मतलब रखता है—क्या सरकार एक आतंक-समर्थक देश पर भरोसा कर रही थी?
क्या यह विश्वासघात नहीं, बल्कि कूटनीतिक चूक है?
क्या इससे मसूद अजहर और हाफिज़ सईद को फिर से भागने का मौका मिला?
क्या इससे हमारे पायलट खतरे में नहीं आ गए?
“1950 के दशक से हर अक्टूबर-नवंबर को विभिन्न दलों के सांसदों को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भेजा जाता था। पीएम मोदी ने 2014 से इस परंपरा को रोक दिया।”
“11 वर्षों तक विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस को बदनाम करने के बाद प्रधानमंत्री अब बहु-पक्षीय प्रतिनिधिमंडल विदेश भेजने को मजबूर हैं। सच्चाई यह है कि बीजेपी की ज़हरीली राजनीति ने हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुँचाया है।”
इस यात्रा के दौरान पूर्व विधायक राजकुमार, वीरेंद्र पोखरियाल उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी,पूर्व महानगर अध्यक्ष लाल चंद शर्मा,नवीन जोशी,प्रवक्ता दीप बोहरा,पार्षद कोमल वोहरा,पार्षद संगीता गुप्ता,पूर्व पार्षद सुमित्रा ध्यानी,मंजू त्रिपाठी,टीटू,त्यागी,विनीत प्रसाद भात बंटू ,अभिनव थापर,मंजू त्रिपाठी,प्रदीप जोशी,आनंद बहुगुणा,दीवान तोमर
पुरन रावत,शाहिद खान
संजय कन्नौजिया कद्दू, बब्बन सतीधर्म सोनकरचरणजीत कौशल संजय कन्नौजिया कद्दू, बब्बन सती
ट्विंकल अरोड़ा
वीरेंद्र पोखरियाल, महिपाल शाह
नवीन रमोला,मोहित
राम थपलियाल हिमांशु रावत पीयूष जोशी मोहित मेहता अमित रावत विपुल नौटियाल उपस्थित थे संचालन प्रमोद गुप्ता ने किया।

 

 

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