प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से आत्मनिर्भर भारत के लिए अगली पीढ़ी के सुधारों का रोडमैप पेश किया.
त्योहारी सीजन से पहले देश के करोड़ों उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए बड़ी राहत की खबर आ सकती है. सितंबर में होने वाली GST काउंसिल की बैठक को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं, क्योंकि इसमें ‘नेक्स्ट-जेनरेशन GST रिफॉर्म्स’ पर मुहर लग सकती है. इन सुधारों का असर आपकी रसोई से लेकर हेल्थ पॉलिसी और कारोबार की लागत तक पड़ेगा.

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12% GST स्लैब हटाने की योजना
वर्तमान GST सिस्टम में 0%, 5%, 12%, 18% और 28% टैक्स स्लैब हैं. सूत्रों के मुताबिक, सरकार 12% स्लैब को पूरी तरह खत्म करने पर विचार कर रही है. ऐसे में 12% टैक्स वाले अधिकांश प्रोडक्ट्स को 5% स्लैब में लाया जा सकता है. इसमें प्रोसेस्ड फूड (मक्खन, घी, सॉस), मोबाइल फोन (कुछ मॉडल), छाता, सिलाई मशीन जैसी चीजें शामिल हैं. इससे इनकी कीमतें सीधे तौर पर कम हो जाएंगी.

हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस में राहत
बैठक में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर लगने वाले 18% GST को घटाकर 5% या शून्य करने का प्रस्ताव भी आ सकता है. इससे पॉलिसी का प्रीमियम कम हो जाएगा और अधिक लोग बीमा कवरेज लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे.
जरूरी वस्तुओं पर टैक्स कटौती
त्योहारी सीजन में महंगाई से राहत देने के लिए रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं पर GST घटाने का भी विचार है. हालांकि किन वस्तुओं पर कटौती होगी, यह बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा.
कारोबारियों के लिए ITC नियम आसान
‘ब्लॉक्ड इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (Blocked ITC) के नियमों में ढील देने का प्रस्ताव है. फिलहाल कुछ चीजों पर चुकाया गया GST कारोबारी वापस क्लेम नहीं कर पाते, जिससे उनका पैसा फंसा रहता है. नियम आसान होने से लाखों MSMEs और छोटे कारोबारियों को नकदी प्रवाह में राहत मिलेगी.
अन्य अहम प्रस्ताव
- GST रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को 3 दिन में पूरा करने की योजना
- रिफंड प्रक्रिया को टेक्नोलॉजी की मदद से तेज और ऑटोमेटिक बनाना
- कोई नया सेस नहीं, केवल कुछ सेस के नाम बदलने का प्रस्ताव
बैठक के महत्व पर विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञ मानते हैं कि GST दरों में कमी से त्योहारों पर खपत बढ़ेगी, जिससे बाजार में रौनक आएगी और लंबे समय में टैक्स कलेक्शन भी बढ़ेगा. वहीं ITC नियमों में सुधार से कारोबारियों की लागत घटेगी और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर किए गए वादे के बाद, सितंबर में होने वाली यह बैठक GST 2.0 की शुरुआत साबित हो सकती है. 12% स्लैब खत्म करना, इंश्योरेंस पर टैक्स घटाना और जरूरी वस्तुओं पर राहत जैसे कदम आम जनता और कारोबारियों दोनों के लिए गेमचेंजर हो सकते हैं.

