Narayan Dutt TiwariUttrakhand Pradesh Congress

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में स्वर्गीय एन डी तिवारी की जन्म व निर्वाण जयंती पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम

नारायण दत्त तिवारी गुदड़ी के वह लाल हैं जिन्होंने भारतीय राजनीति की पथरीली राहें तय कर संघर्ष, श्रम, साधना से शानदार राजनीतिक सफलता प्राप्त की है। अत्यन्त साधारण परिवार में जन्म लेकर इन्होंने बचपन से ही निरंतर संघर्षरत रहकर श्रम, साधना और अध्यवसाय के सोपानों पर चढ़कर भारतीय राजनीति की उल्लेखनीय ऊँचाइ‌यों तक पहुँचाया।

एनडी तिवारी: जिनकी याददाश्त और समझ से अधिकारी भी ख़ौफ़ खाते थे

नारायण दत्त तिवारी जी की जन्म 18 अक्टूबर 1925 को ग्राम बल्यूटी, पदमपुरी, नैनीताल में हुआ था। उनका बचपन नैनीताल में ही बीता। तिवारी जी की प्राम्भिक शिक्षा की शुरुआत नैनीताल से हुई और फिर उन्होंने बरेली में आगे की शिक्षा हासिल की। उनके पिता पूर्णानंद तिवारी जीवन विभाग में अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। उनके पिता जी की गाँधीवादी विचारधारा से प्रभावित थे। इसके चलते उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और गाँधी जी के साथ असहयोग आन्दोलन में जुड़ गए। अपनी शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत नारायण दत्त तिवारी जी अपने पिता जी के पद चिन्हों पर चलते हुए देश की आजादी आंदोलन में उत्तर आये।

किस्सा नारायण दत्त तिवारी के लाल पेन और उस रिकॉर्ड का जो इतिहास में दर्ज हुआ | Former up and uttrakhand cm narayan dutt tiwari birth anniversary 2022 interesting facts about nd

 

उत्तराखंड की प्रथम निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री रहे श्री नारायण दत्त तिवारी उत्तराखंड के एक मात्र विकास पुरुष रहे जिन्होंने नवोदित राज्य की एक मजबूत आधारशिला रखी और पांच वर्ष के कार्यकाल में वो सब कर दिखाया जो बाकी के बीस वर्षों में दस मुख्यमंत्री मिल कर भी नहीं कर पाए यह उद्गार आज उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में स्वर्गीय एन डी तिवारी की जन्म व निर्वाण जयंती पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने कही। श्री धस्माना ने कहा कि वे राज्य के प्रथम निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री थे और नए राज्य में प्रशासनिक आर्थिक ढांचागत सुविधाओं समेत अनेक चुनौतियां थीं।

 

 

राज्य में तराई के इलाकों में उत्तराखंड से अलग उत्तरप्रदेश के साथ रहने का आंदोलन हरिद्वार व उधमसिंह नगर में था। श्री धस्माना ने कहा कि इन चुनौतियों के अलावा श्री तिवारी के सामने कांग्रेस के भीतर भी कुछ चुनौतियां थीं किंतु अपने व्यापक राजनैतिक व प्रशासनिक अनुभवों का सदुपयोग करते हुए उन्होंने सभी चुनौतियों का बहुत सौम्यता से सामना ही नहीं किया बल्कि उन चुनौतियों को ही समाप्त कर दिया समाधान खोज कर। श्री धस्माना ने कहा कि राज्य के गोरखाली समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करवाने का निर्णय श्री तिवारी जी ने उनके (श्री धस्माना के) आग्रह पर किया था, कहा कि उत्तराखंड राज्य हमेशा श्री तिवारी के महान योगदान को याद रखेगा।

 

 

कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री जगदीश धीमान, प्रदेश कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ अध्यक्ष दिनेश कौशल, प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा के मीडिया सलाकार सरदार अमरजीत सिंह, श्रीमती सावित्री थापा, श्रीमती अनुराधा, श्री विकास भारद्वाज , विपुल नौटियाल आदि उपस्थित रहे।

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